• Thu. Aug 13th, 2026

रोहतक में स्वास्थ्य बीमा कंपनी को पॉलिसीधारक को 99,265 रुपये देने का आदेश

13 अगस्त, 2026 :  जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रोहतक ने एक निजी स्वास्थ्य बीमा कंपनी को पॉलिसीधारक अमित गर्ग को 99,265 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने कोविड-19 के इलाज से जुड़े बीमा दावे में की गई कटौतियों को अनुचित और पर्याप्त दस्तावेजी आधार के बिना किया गया माना।

तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कादियान तथा सदस्य डॉ. तृप्ति पन्नू और डॉ. विजेंद्र सिंह शामिल थे, ने अमित गर्ग की शिकायत पर यह आदेश पारित किया। गर्ग के पास स्वयं, अपनी पत्नी और दो बच्चों के लिए 5 लाख रुपये की बीमा राशि वाली स्वास्थ्य पॉलिसी थी। इसके अलावा उन्हें 2.5 लाख रुपये का अतिरिक्त बोनस कवर भी मिला हुआ था।

शिकायत के अनुसार, मई 2021 में कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद अमित गर्ग ने पहले एक निजी अस्पताल में इलाज कराया। इसके बाद उन्हें 15 मई से 19 मई 2021 तक एक अन्य सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इस दौरान उनके इलाज पर कुल 1,76,962 रुपये खर्च हुए।

बीमा कंपनी ने उनके दावे में से केवल 77,697 रुपये मंजूर किए और बाकी 99,265 रुपये की राशि अलग-अलग आधार पर काट दी। इसके बाद गर्ग ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और आरोप लगाया कि बीमा कंपनी ने उनके वैध दावे का पूरा भुगतान नहीं किया। उन्होंने कटौती की गई राशि के साथ मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए भी मुआवजे की मांग की।

बीमा कंपनी ने आयोग के सामने कटौती को सही ठहराने की कोशिश की। कंपनी का कहना था कि कुछ खर्चों से संबंधित प्रयोगशाला रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। इसके अलावा रेमडेसिविर और कोविड-19 उपचार पैकेज से जुड़े दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कुछ अन्य कटौतियों को भी उचित बताया गया।

हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने पाया कि कंपनी ने ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि पॉलिसीधारक से कथित रूप से गायब प्रयोगशाला रिपोर्ट पहले मांगी गई थीं। कंपनी रिकॉर्ड में ऐसा कोई नोटिस, पत्र, ईमेल या अन्य संचार नहीं दिखा सकी, जिससे यह साबित हो कि शिकायतकर्ता को दस्तावेजी कमी दूर करने का उचित अवसर दिया गया था।

आयोग ने रेमडेसिविर से संबंधित 22,970 रुपये की कटौती को भी उचित नहीं माना। पीठ ने कहा कि बीमा कंपनी ने उस समय रेमडेसिविर इंजेक्शन की स्वीकार्य कीमत साबित करने के लिए कोई प्रामाणिक दस्तावेज, मूल्य अधिसूचना या अन्य विश्वसनीय प्रमाण पेश नहीं किया।

आयोग ने माना कि बीमा दावे में की गई कटौतियां पर्याप्त कानूनी और दस्तावेजी साक्ष्य पर आधारित नहीं थीं। इसे सेवा में कमी और बीमा दावे के अनुचित निपटारे के रूप में देखा गया। इसके बाद आयोग ने बीमा कंपनी और उसकी शाखा को पॉलिसीधारक को राशि लौटाने का निर्देश दिया।

आदेश के अनुसार, कंपनी को 99,265 रुपये की मूल राशि के साथ 12 नवंबर 2021 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह ब्याज शिकायत दायर किए जाने की तारीख से वास्तविक भुगतान होने तक लागू रहेगा।

इसके अलावा आयोग ने मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के लिए पॉलिसीधारक को 5,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। मुकदमे के खर्च के तौर पर भी कंपनी को 5,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर इसका पालन करना होगा।

यह फैसला उन पॉलिसीधारकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है जिन्हें स्वास्थ्य बीमा दावों के निपटारे के दौरान बिना पर्याप्त दस्तावेजी आधार के कटौती का सामना करना पड़ता है। आयोग ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि बीमा कंपनी द्वारा दावा राशि में कटौती किए जाने पर उसके समर्थन में उचित रिकॉर्ड और प्रमाण होना जरूरी है।

मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि यदि किसी पॉलिसीधारक को लगता है कि उसके स्वास्थ्य बीमा दावे का अनुचित तरीके से निपटारा किया गया है, तो वह उपभोक्ता आयोग के माध्यम से अपनी शिकायत उठा सकता है। रोहतक आयोग के इस आदेश में पॉलिसीधारक को मूल बकाया राशि के साथ ब्याज, मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का निर्देश दिया गया है।

फिलहाल आयोग के आदेश के बाद बीमा कंपनी को निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान करना होगा। इस मामले में कुल भुगतान में 99,265 रुपये की मूल राशि, उस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज तथा मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए 10,000 रुपये शामिल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *