• Wed. Sep 30th, 2026

‘Me Time’ से माउंटेन अचीवमेंट तक: अमृतसर की कनवलदीप कौर ने खारदुंग ला की 72 किमी चुनौती की पूरी

30 सितंबर 2026 अमृतसर की फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और होलिस्टिक हेल्थ प्रैक्टिशनर कनवलदीप कौर ने खारदुंग ला की 72 किलोमीटर लंबी चुनौती पूरी कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। यह चुनौती लद्दाख मैराथन का हिस्सा थी और इसे देश की कठिन अल्ट्रा मैराथन चुनौतियों में गिना जाता है।

कनवलदीप कौर के लिए रनिंग कोई अचानक शुरू किया गया अभियान नहीं था। कई वर्षों से वह इसे अपने रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाए हुए हैं। उनके लिए दौड़ना ‘me time’ यानी खुद के लिए समय निकालने का एक तरीका रहा है। इसी नियमित अभ्यास और लंबे समय की तैयारी ने उन्हें लद्दाख की कठिन पहाड़ी चुनौती तक पहुंचाया।

15 साल की रनिंग और योग से बनी तैयारी

कनवलदीप कौर ने करीब 15 वर्षों से रनिंग और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया हुआ है। वह Yin Yoga और Power Yoga दोनों का अभ्यास करती रही हैं। उनके मुताबिक, योग ने उन्हें शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद की।

खारदुंग ला अल्ट्रा मैराथन की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी सामान्य दिनचर्या से काफी अधिक मेहनत की। मई से अगस्त के बीच उनका प्रशिक्षण काफी कठिन रहा और वह रोजाना कई घंटे तैयारी तथा रनिंग में बिताती थीं।

उनकी सामान्य साप्ताहिक रनिंग लगभग 40 से 45 किलोमीटर रही। घर और अन्य जिम्मेदारियों के बीच इस तरह का प्रशिक्षण जारी रखना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने इसे लगातार जारी रखा।

3,975 मीटर से शुरू होकर 5,370 मीटर तक पहुंचा सफर

खारदुंग ला चैलेंज में रन लगभग 3,975 मीटर की ऊंचाई से शुरू होता है। इसके बाद प्रतिभागियों को करीब 5,370 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खारदुंग ला तक चढ़ना पड़ता है।

इस चुनौती का एक बड़ा हिस्सा 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर होता है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 60 किलोमीटर का रूट समुद्र तल से 4,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर है। इसके बाद धावकों को नीचे उतरते हुए लेह की ओर जाना होता है।

इतनी ऊंचाई पर दौड़ना सामान्य मैराथन की तुलना में अलग तरह की चुनौती पेश करता है। कम ऑक्सीजन, चढ़ाई, लंबी दूरी और लगातार बदलते मौसम के बीच धावक को शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती की भी जरूरत होती है।

बेटे और पति ने भी तैयारी में दिया साथ

कनवलदीप कौर ने अपनी तैयारी के दौरान परिवार को भी साथ जोड़े रखा। उन्होंने बताया कि वह कई बार सुबह करीब 3 बजे अपने 15 वर्षीय बेटे को साथ लेकर ट्रेनिंग के लिए निकलती थीं।

उनका बेटा उनकी लोकेशन ट्रैक करता था और उनकी प्रगति पर नजर रखता था। उनके पति भी इस पूरी तैयारी के दौरान उनका समर्थन करते रहे। इस तरह परिवार की भूमिका भी उनकी तैयारी का अहम हिस्सा बनी रही।

पहले से हासिल कर चुकी थीं जरूरी अनुभव

खारदुंग ला चैलेंज में हिस्सा लेने के लिए धावकों को पहले से अपनी endurance क्षमता साबित करनी होती है। कनवलदीप कौर ने इससे पहले भी लंबी दूरी की दौड़ में हिस्सा लिया था।

उन्होंने पांच घंटे से कम समय में मैदानी क्षेत्र में फुल मैराथन पूरी की थी। इसके अलावा वह 50 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन छह घंटे के भीतर पूरी कर चुकी थीं। 42 किलोमीटर की दूरी भी उन्होंने निर्धारित समय के भीतर पूरी की थी।

इन अनुभवों ने उन्हें खारदुंग ला जैसी कठिन चुनौती के लिए आवश्यक आधार तैयार करने में मदद की।

सबसे कठिन रहा आखिरी हिस्सा

कनवलदीप कौर के मुताबिक, पूरी चुनौती में चढ़ाई कठिन थी, लेकिन अंतिम चरण में उतरना भी बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। खासकर आखिरी किलोमीटर में थकान काफी बढ़ गई थी।

इसके बावजूद जब वह चुनौती पूरी करने के करीब पहुंचीं तो उन्हें राहत और खुशी दोनों महसूस हुई। उनके लिए यह सिर्फ 72 किलोमीटर की दौड़ नहीं थी, बल्कि वर्षों की नियमित मेहनत, अनुशासन और मानसिक तैयारी का परिणाम था।

महिलाओं के लिए दिया फिटनेस का संदेश

कनवलदीप कौर ने अपनी उपलब्धि के साथ महिलाओं को फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर भी संदेश दिया। उनका मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों के अनुसार पोषण और रिकवरी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

विशेष रूप से मेनोपॉज के दौरान मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना और शरीर को पर्याप्त आराम देना जरूरी है। वह नींद और हाइड्रेशन को रिकवरी का अहम हिस्सा मानती हैं।

उनकी रोजमर्रा की डाइट भी मुख्य रूप से घर के बने भोजन पर आधारित है। उनका फिटनेस मंत्र किसी जल्दबाजी वाले बदलाव के बजाय नियमितता और निरंतरता पर केंद्रित है।

अगले लक्ष्य की ओर नजर

खारदुंग ला चुनौती पूरी करने के बाद कनवलदीप कौर अब इससे भी लंबी दूरी की चुनौती की ओर देख रही हैं। उन्होंने बताया कि लद्दाख में उन्हें 65 वर्ष की महिला धावक भी मिलीं, जिन्होंने उन्हें अगले साल 122 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।

इससे उनकी कहानी केवल एक अल्ट्रा मैराथन पूरी करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह दिखाती है कि लंबे समय तक नियमित अभ्यास और अनुशासन के जरिए कठिन शारीरिक चुनौतियों की तैयारी की जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *