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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बढ़ता छात्र-कक्षा अनुपात, 90 छात्रों तक की एक कक्षा का दावा

30 सितंबर 2026 दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्र-कक्षा अनुपात (Student Classroom Ratio) को लेकर सवाल उठाए गए हैं। एक वकील ने दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर कई सरकारी स्कूलों, खासकर पूर्वी दिल्ली के स्कूलों में कक्षाओं में छात्रों की संख्या अधिक होने का मुद्दा उठाया है। शिकायत में दावा किया गया है कि कुछ वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं में छात्रों की संख्या 70 से 80 तक पहुंच रही है और कुछ मामलों में यह संख्या करीब 90 तक बताई गई है।

कक्षाओं में छात्रों की संख्या अधिक होने का दावा

वकील अशोक अग्रवाल ने दिल्ली सरकार के शिक्षा सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि कई स्कूलों में छात्र-कक्षा अनुपात काफी अधिक है। उनके अनुसार, यह समस्या विशेष रूप से वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं में गंभीर दिखाई दे रही है, जहां एक ही सेक्शन में बड़ी संख्या में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है।

पत्र में पूर्वी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल का उदाहरण देते हुए दावा किया गया है कि एक कक्षा में करीब 90 छात्र हैं। इनमें से लगभग 45 छात्रों के कक्षा में उपस्थित नहीं होने की बात भी कही गई है। इसके पीछे पर्याप्त जगह और बैठने की व्यवस्था नहीं होने को कारण बताया गया है।

अतिरिक्त सेक्शन नहीं बनने से परेशानी

अशोक अग्रवाल ने कहा कि अधिक छात्र संख्या के बावजूद अतिरिक्त सेक्शन नहीं बनाए जाने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि एक कक्षा में अत्यधिक संख्या होने पर विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बैठने की जगह उपलब्ध कराना और उन्हें प्रभावी तरीके से पढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि किसी स्कूल में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सेक्शन बनाए जाने चाहिए, ताकि कक्षाओं में छात्रों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके।

विषय शिक्षकों की कमी का भी मुद्दा

शिकायत में केवल कक्षा की जगह का मुद्दा ही नहीं उठाया गया, बल्कि वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर विषय शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई गई है। विशेष रूप से फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी का उल्लेख किया गया है।

वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं में विषय आधारित पढ़ाई अधिक महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों के साथ पर्याप्त विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से शिक्षण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

छात्रों की नियमित उपस्थिति पर असर का दावा

पत्र में कहा गया है कि कक्षाओं में पर्याप्त जगह और बैठने की व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्रों की नियमित उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है। यदि कक्षा में छात्रों की संख्या उसकी उपलब्ध क्षमता से काफी अधिक हो, तो विद्यार्थियों के लिए सामान्य तरीके से पढ़ाई करना मुश्किल हो सकता है।

अशोक अग्रवाल ने शिक्षा विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि सभी छात्रों को नियमित रूप से कक्षाओं में बैठने और पढ़ाई करने का अवसर मिल सके।

शिक्षा के अधिकार से भी जोड़ा मुद्दा

वकील ने इस समस्या को छात्रों के शिक्षा के अधिकार से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि प्रत्येक छात्र को पर्याप्त जगह और ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वह प्रभावी तरीके से शिक्षा प्राप्त कर सके।

उन्होंने कहा कि केवल स्कूल में दाखिला मिलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को उचित कक्षा, बैठने की व्यवस्था और पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।

शिक्षा विभाग से अतिरिक्त सेक्शन बनाने की मांग

शिकायत में शिक्षा विभाग से उन स्कूलों की पहचान करने की मांग की गई है, जहां छात्र-कक्षा अनुपात बहुत अधिक है। ऐसे स्कूलों में अतिरिक्त सेक्शन बनाने और जरूरत के अनुसार अन्य व्यवस्थाएं करने का सुझाव दिया गया है।

इससे कक्षाओं में छात्रों की संख्या कम करने के साथ-साथ शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच बेहतर शैक्षणिक संवाद स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं पर विशेष ध्यान की जरूरत

वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर छात्रों को अलग-अलग विषयों के अनुसार पढ़ाई करनी होती है। ऐसे में कक्षाओं में पर्याप्त जगह और विषय शिक्षकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो जाती है।

शिकायत में इसी वजह से वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं में छात्र-कक्षा अनुपात को कम करने और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सेक्शन बनाने पर जोर दिया गया है।

शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं का महत्व

सरकारी स्कूलों में बढ़ती छात्र संख्या के साथ पर्याप्त कक्षाओं, शिक्षकों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में स्कूलों में दाखिला बढ़ता है तो उसी के अनुरूप बुनियादी ढांचे की क्षमता बढ़ाना भी आवश्यक हो जाता है।

फिलहाल उठाई गई शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग से इस मामले में आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित स्कूलों में वास्तविक छात्र-कक्षा अनुपात और उपलब्ध संसाधनों का आधिकारिक स्तर पर आकलन किया जाए।

कुल मिलाकर, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्र-कक्षा अनुपात को लेकर एक बार फिर चिंता सामने आई है। वकील अशोक अग्रवाल ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर कुछ स्कूलों में 70 से 80 और कुछ मामलों में करीब 90 छात्रों वाली कक्षाओं का दावा किया है। उन्होंने अतिरिक्त सेक्शन बनाने, पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध कराने और विषय शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की है।

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