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हरियाणा में बिना BJP बैनर के जनसंपर्क कर रहे कुलदीप बिश्नोई, सियासी रणनीति को लेकर चर्चा तेज

30 सितंबर 2026 हरियाणा के पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई इन दिनों अपने पारंपरिक प्रभाव वाले इलाकों में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। खास बात यह है कि इन कार्यक्रमों में BJP के झंडे, बैनर या अन्य पार्टी प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। हिसार, सिरसा, जींद, कैथल और चरखी दादरी में उनके लगातार हो रहे कार्यक्रमों ने उनकी राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

समर्थकों से सीधा संपर्क बढ़ा रहे कुलदीप बिश्नोई

कुलदीप बिश्नोई इन दिनों सार्वजनिक संपर्क कार्यक्रमों के साथ-साथ समर्थकों के साथ बंद कमरे में बैठकें भी कर रहे हैं। इन बैठकों का फोकस अपने पुराने राजनीतिक आधार और समर्थकों के साथ सीधे संपर्क को बनाए रखने पर दिखाई दे रहा है।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इन कार्यक्रमों में BJP के संगठनात्मक बैनर और पार्टी के प्रतीकों की अनुपस्थिति को राजनीतिक हलकों में खास तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, कुलदीप बिश्नोई ने खुद BJP से अलग होने की घोषणा नहीं की है और वह पार्टी में होने की बात कहते रहे हैं।

2024 के बाद बदले राजनीतिक समीकरण

कुलदीप बिश्नोई के राजनीतिक सफर में आदमपुर का खास महत्व रहा है। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में उनके बेटे भव्या बिश्नोई को आदमपुर सीट पर कांग्रेस के चंदर प्रकाश से हार का सामना करना पड़ा। यह सीट लंबे समय से बिश्नोई परिवार के राजनीतिक प्रभाव का प्रमुख केंद्र रही है।

इसके अलावा कुलदीप बिश्नोई को हिसार लोकसभा चुनाव में BJP का टिकट नहीं मिला। इसके बाद राज्यसभा सीट के लिए भी उनका नाम चर्चा में रहा, लेकिन उन्हें राज्यसभा का नामांकन नहीं मिला। इन घटनाओं के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

BJP से दूरी या अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश?

बिना पार्टी बैनर के जनसंपर्क कार्यक्रमों को लेकर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे कुलदीप बिश्नोई की ओर से BJP छोड़ने के फैसले के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

उनका मौजूदा अभियान अपने समर्थकों और पारंपरिक राजनीतिक आधार के साथ संपर्क मजबूत करने की दिशा में है। उनके कार्यक्रमों में पार्टी संगठन की बजाय व्यक्तिगत जनसंपर्क पर ज्यादा जोर दिखाई दे रहा है।

BJP और बिश्नोई समुदाय का समीकरण भी अहम

हरियाणा की राजनीति में बिश्नोई समुदाय का अपना महत्व है और कुलदीप बिश्नोई लंबे समय से इस समुदाय के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में रहे हैं। ऐसे में उनके जनसंपर्क अभियान को केवल स्थानीय स्तर की गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

द ट्रिब्यून के अनुसार, BJP भी क्षेत्र में बिश्नोई समुदाय के साथ अपने संपर्क को बनाए रखने की कोशिश कर रही है। ऐसे में कुलदीप बिश्नोई की व्यक्तिगत सक्रियता और BJP के संगठनात्मक संपर्क के बीच संबंध पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।

पहले भी BJP नेतृत्व के साथ सामने आ चुके हैं मतभेद

कुलदीप बिश्नोई और BJP नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय में मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल को लेकर BJP नेताओं की टिप्पणियों के बाद कुलदीप बिश्नोई ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद पार्टी के कुछ नेताओं के साथ उनका सार्वजनिक विवाद भी सामने आया।

हालांकि, बाद में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिल्ली स्थित बिश्नोई परिवार के आवास पर मुलाकात की थी। जून 2026 में हुई इस मुलाकात को पार्टी के भीतर बने तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा गया था।

कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक सफर

कुलदीप बिश्नोई ने 2007 में कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठन किया था। इसके बाद उनकी पार्टी ने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन किया। HJC-BJP गठबंधन 2015 में समाप्त हुआ और बाद में HJC का कांग्रेस में विलय हो गया।

2022 में कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थामा था। इसके बाद वह BJP के साथ जुड़े रहे हैं।

आगे की रणनीति पर निगाहें

अब हिसार और आसपास के क्षेत्रों में उनके लगातार जनसंपर्क कार्यक्रमों के बीच उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा जारी है। बिना BJP के झंडे और बैनर के कार्यक्रम आयोजित करना उनके अभियान की एक प्रमुख विशेषता बन गया है।

हालांकि, मौजूदा स्थिति में उनकी ओर से BJP छोड़ने या किसी अन्य राजनीतिक दल में जाने की कोई घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए उनके वर्तमान अभियान को लेकर अंतिम राजनीतिक निष्कर्ष निकालने के बजाय आने वाले कार्यक्रमों और उनके बयानों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, कुलदीप बिश्नोई हरियाणा के कई इलाकों में अपने समर्थकों के बीच जनसंपर्क बढ़ा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में BJP के पार्टी प्रतीकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चा जरूर तेज कर दी है, लेकिन वह खुद BJP में बने रहने की बात कहते रहे हैं। ऐसे में उनका मौजूदा जनसंपर्क अभियान उनके व्यक्तिगत राजनीतिक आधार और भविष्य की भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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