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पढ़ाई में 98.6% के बाद शूटिंग में एशियन गेम्स सिल्वर, रोहतक की Aashima Ahlawat ने बढ़ाया मान

30 सितंबर 2026 हरियाणा के रोहतक की रहने वाली शूटर आशिमा अहलावत (Aashima Ahlawat) ने Asian Games 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर अपने परिवार और शहर का नाम रोशन किया है। आशिमा भारतीय महिला शूटिंग टीम का हिस्सा थीं, जिसने जापान में आयोजित एशियन गेम्स में महिला ट्रैप टीम इवेंट में रजत पदक हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि के पीछे खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी शानदार प्रदर्शन की कहानी जुड़ी हुई है।

12वीं में हासिल किए 98.6 प्रतिशत अंक

आशिमा अहलावत ने शूटिंग को करियर बनाने से पहले अपनी मां के सामने एक चुनौती स्वीकार की थी। उनकी मां सुमित्रा अहलावत चाहती थीं कि बेटी अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, क्योंकि वह पढ़ाई में बेहद अच्छा प्रदर्शन कर रही थीं।

जब आशिमा ने शूटिंग में करियर बनाने की इच्छा जताई तो उनकी मां ने कहा कि अगर वह कक्षा 12वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल करती हैं, तभी उन्हें शूटिंग को गंभीरता से आगे बढ़ाने की अनुमति मिलेगी।

आशिमा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 12वीं कक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उनके लिए शूटिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता खुला।

मेडिकल स्ट्रीम से शुरू हुआ शूटिंग का सफर

आशिमा ने 11वीं कक्षा में मेडिकल स्ट्रीम चुनी थी। पढ़ाई के साथ वह डिबेट और लेखन जैसी गतिविधियों में भी हिस्सा लेती थीं। इसी दौरान टेलीविजन पर शूटिंग प्रतियोगिताएं देखने के बाद उनकी इस खेल में रुचि बढ़ी।

12वीं के बाद उन्होंने शूटिंग की ट्रेनिंग शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में उन्होंने फरीदाबाद स्थित मानव रचना यूनिवर्सिटी में प्रशिक्षण लिया। शुरुआती दौर में आशिमा को रोजाना रोहतक से फरीदाबाद तक सफर करना पड़ता था।

उनकी मां के अनुसार, वह करीब तीन महीने तक रोजाना लगभग पांच घंटे यात्रा करके शूटिंग की ट्रेनिंग लेती रहीं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की करनी सिंह शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।

राज्य स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं

आशिमा ने शूटिंग में अपना सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। शुरुआत में उन्होंने राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं और यूनिवर्सिटी गेम्स में हिस्सा लिया और पदक जीते।

इसके बाद उन्होंने Khelo India और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।

Asian Games 2026 में उनका प्रदर्शन इसी लंबे सफर की एक बड़ी उपलब्धि बन गया। भारतीय महिला शूटिंग टीम ने महिला ट्रैप टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता, जिसमें आशिमा भी टीम की सदस्य थीं।

पिता को छह साल की उम्र में खो दिया

आशिमा की व्यक्तिगत जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही है। उन्होंने महज छह साल की उम्र में सड़क हादसे में अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद उनकी मां सुमित्रा अहलावत ने आशिमा और उनकी छोटी बहन की परवरिश की।

एक मां के तौर पर सुमित्रा ने अपनी बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को संभालने के साथ-साथ आशिमा के खेल करियर को भी समर्थन दिया। शूटिंग के शुरुआती दौर में आने वाली कई मुश्किलों के बावजूद उन्होंने बेटी का साथ नहीं छोड़ा।

पढ़ाई भी जारी रखी

आशिमा ने खेल के साथ अपनी पढ़ाई को भी जारी रखा। उन्होंने Lady Shri Ram College से ग्रेजुएशन किया और वर्तमान में Delhi School of Economics में पोस्टग्रेजुएशन कर रही हैं।

इस तरह उनकी उपलब्धि केवल शूटिंग तक सीमित नहीं है। पढ़ाई और खेल दोनों क्षेत्रों में लगातार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने एक अलग पहचान बनाई है।

अब ओलंपिक पदक पर नजर

Asian Games में सिल्वर मेडल जीतने के बाद आशिमा का अगला बड़ा लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतना है। उनकी मां के अनुसार, बेटी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी उपलब्धि हासिल करने की तैयारी में जुटी है।

आशिमा मूल रूप से खरखड़ा गांव से ताल्लुक रखती हैं, जबकि उनका परिवार रोहतक में रहता है। परिवार उनके लौटने का इंतजार कर रहा है। उनके लौटने की तारीख 2 अक्टूबर बताई गई है।

रोहतक के लिए गर्व का पल

आशिमा अहलावत की कहानी इस बात को दिखाती है कि पढ़ाई और खेल को साथ लेकर भी आगे बढ़ा जा सकता है। 12वीं में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद शूटिंग में करियर बनाना और फिर एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक जीतना उनकी मेहनत और निरंतरता को दर्शाता है।

Asian Games 2026 में महिला ट्रैप टीम का सिल्वर मेडल उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है। अब उनकी नजर ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतने के बड़े लक्ष्य पर है।

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