13 अगस्त, 2026 : करनाल के जिला सिविल अस्पताल के लेबर रूम में बेड और जगह की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में स्थिति इतनी गंभीर है कि एक ही बेड पर एक से अधिक महिलाओं को रखने की नौबत आ गई है। इससे मरीजों की सुरक्षा, निजता, साफ-सफाई और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
200 बेड की क्षमता वाले जिला सिविल अस्पताल में लेबर रूम के लिए फिलहाल 41 बेड हैं। इनमें 18 एंटीनाटल केयर (ANC) और 23 पोस्टनाटल केयर (PNC) बेड शामिल हैं। इसके अलावा अस्पताल की दूसरी मंजिल पर 14 PNC बेड उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर ANC और PNC मरीजों के लिए 55 बेड हैं, लेकिन इनके मुकाबले 126 महिलाएं भर्ती थीं। इससे अस्पताल में ओवरक्राउडिंग की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अस्पताल में बढ़ती भीड़ का असर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। प्रसव से पहले और प्रसव के बाद महिलाओं को पर्याप्त जगह और लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में सीमित बेड और कम जगह के कारण स्वास्थ्य कर्मचारियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 1 जनवरी से 11 अगस्त तक जिला सिविल अस्पताल में कुल 1,986 प्रसव हुए। इनमें 1,328 सामान्य प्रसव और 658 सीजेरियन सेक्शन (C-section) शामिल हैं। बड़ी संख्या में प्रसव होने के कारण लेबर और पोस्टनाटल वार्ड पर लगातार दबाव बना हुआ है।
मरीजों के परिजनों ने लेबर रूम की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रसव के समय महिलाओं को पर्याप्त निजता, आराम और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत होती है, लेकिन बेड की कमी के कारण एक ही बेड पर एक से अधिक मरीजों को रखने से परेशानी बढ़ रही है।
भीड़भाड़ के कारण संक्रमण नियंत्रण और स्वच्छता को लेकर भी चिंता जताई गई है। मां और नवजात बच्चे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं, इसलिए प्रसव से जुड़े वार्डों में साफ-सफाई और पर्याप्त जगह का होना बेहद जरूरी माना जाता है।
स्थानीय लोगों ने करनाल में एक अलग 100-बेड वाले मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) केंद्र की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा अस्पताल की जमीन काल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबंधित होने के कारण वर्तमान भवन में विस्तार की पर्याप्त संभावना नहीं है। इसलिए शहर में अलग MCH यूनिट स्थापित करना बेहतर समाधान हो सकता है।
अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सरिता बिश्नोई ने कहा कि अस्पताल प्रशासन सभी मरीजों को समायोजित करने और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि लेबर रूम पहले से ही LaQshya-certified है और स्वच्छता एवं साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
डॉ. बिश्नोई के अनुसार, अस्पताल में नया ऑपरेशन थिएटर (OT) ब्लॉक भी स्थापित किया गया है। इससे सीजेरियन डिलीवरी के लिए मरीजों को होने वाले इंतजार को कम करने में मदद मिली है।
सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि अस्पताल ने एंटीनाटल और पोस्टनाटल मामलों के रेफरल की दर को कम किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए सिविल अस्पताल का निर्माण जल्द शुरू होगा। नए अस्पताल में मां और बच्चे की देखभाल के लिए एक समर्पित MCH यूनिट उपलब्ध कराने की योजना है।
अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पोस्टनाटल मरीजों के लिए सामान्य वार्डों में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है।
मौजूदा जिला सिविल अस्पताल का भवन काफी पुराना है। अधिकारियों के अनुसार, यह भवन पहले किंग एडवर्ड अस्पताल के नाम से जाना जाता था और इसकी आधारशिला 17 अप्रैल 1911 को रखी गई थी। बाद में अस्पताल की व्यवस्था में कई बदलाव हुए और 2017 में पुराने भवन में जिला सिविल अस्पताल दोबारा शुरू किया गया। नए सिविल अस्पताल के लिए सेक्टर-32 में जमीन भी चिन्हित की गई है।
फिलहाल लेबर रूम में बेड की कमी करनाल के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे के सामने बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। एक ओर अस्पताल में बड़ी संख्या में प्रसव हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध बेड सीमित हैं। ऐसे में नए अस्पताल और समर्पित MCH यूनिट का निर्माण मरीजों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह मौजूदा परिस्थितियों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत है। वहीं, मरीजों और स्थानीय लोगों की मांग है कि बेड की कमी का स्थायी समाधान जल्द किया जाए, ताकि प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
