13 अगस्त, 2026 : हरियाणा में राइस मिलर्स ने कस्टम मिल्ड राइस (CMR) से जुड़े लंबित मामलों और कथित बकाये को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मिलर्स ने अपनी मांगों के समाधान की मांग करते हुए 13 अगस्त से हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।
मिलर्स का कहना है कि CMR की डिलीवरी और उससे जुड़े पुराने मामलों को लेकर लंबे समय से कई मुद्दे लंबित हैं। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
CMR व्यवस्था के तहत सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान को राइस मिलर्स को मिलिंग के लिए दिया जाता है। मिलिंग के बाद तैयार चावल को निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित सरकारी एजेंसी या भारतीय खाद्य निगम (FCI) को उपलब्ध कराना होता है। हरियाणा की मौजूदा मिलिंग नीति में समय पर CMR जमा नहीं करने वाले मिलर्स को डिफॉल्टर घोषित करने का प्रावधान भी है।
मिलर्स की प्रमुख चिंता पुराने CMR मामलों और उससे जुड़े वित्तीय दायित्वों को लेकर है। राज्य सरकार ने भी अपने 2026-27 के बजट में ऐसे राइस मिलर्स के लिए वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम लाने का प्रस्ताव रखा है, जो पिछले वर्षों में FCI को पूरा CMR समय पर उपलब्ध नहीं करा सके थे। इससे संकेत मिलता है कि पुराने CMR मामलों का समाधान सरकार के एजेंडे में शामिल है।
मिलर्स का कहना है कि जब तक लंबित मामलों को स्पष्ट तरीके से निपटाया नहीं जाता, तब तक कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है। उनका दावा है कि पुराने मामलों के कारण कई मिलर्स पर वित्तीय दबाव बना हुआ है और बैंकिंग तथा कारोबार संबंधी गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ रहा है।
हड़ताल के फैसले से राज्य में धान की खरीद और मिलिंग व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। राइस मिलर्स की भूमिका धान को चावल में बदलने और सरकारी एजेंसियों तक तैयार चावल पहुंचाने में महत्वपूर्ण होती है। यदि हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है, तो इसका असर आगामी खरीद और मिलिंग प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
सरकार की ओर से पहले भी CMR से जुड़े डिफॉल्टर मिलर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। हरियाणा विधानसभा की सार्वजनिक लेखा समिति की रिपोर्ट में भी ऐसे मामलों का उल्लेख है, जहां निर्धारित समय पर CMR की डिलीवरी नहीं होने पर नोटिस, ब्लैकलिस्टिंग और वसूली की कार्रवाई की गई थी।
मौजूदा विवाद में मिलर्स चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्याओं पर बातचीत करे और लंबित CMR मामलों के समाधान के लिए व्यावहारिक रास्ता निकाले। खासतौर पर पुराने मामलों के निपटारे और वित्तीय देनदारियों को लेकर स्पष्ट नीति की मांग की जा रही है।
दूसरी ओर, सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि सरकारी खाद्यान्न की मिलिंग और CMR की आपूर्ति निर्धारित नियमों के अनुसार होती रहे। CMR की समय पर डिलीवरी सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकारी खाद्यान्न भंडार के लिए महत्वपूर्ण है।
राज्य सरकार द्वारा वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम का प्रस्ताव ऐसे मिलर्स के लिए राहत का रास्ता खोल सकता है, लेकिन मिलर्स की वर्तमान मांगों और हड़ताल को देखते हुए इसके क्रियान्वयन तथा शर्तों को लेकर आगे चर्चा महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल हरियाणा में राइस मिलर्स के हड़ताल पर जाने से सरकार और मिलर्स के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार मिलर्स के साथ बातचीत शुरू करती है या नहीं और CMR से जुड़े लंबित मामलों को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
