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हरियाणा में न्यायिक सेवा अभ्यर्थियों के लिए 3 साल की वकालत का अनुभव अनिवार्य

11 अगस्त, 2026 :  हरियाणा सरकार ने न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बड़ा बदलाव किया है। अब ज्यूडिशियल सर्विसेज के उम्मीदवारों के लिए कम से कम 3 साल की कानूनी प्रैक्टिस का अनुभव अनिवार्य होगा।

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य न्यायिक सेवा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को व्यावहारिक कानूनी अनुभव उपलब्ध कराना और न्यायिक जिम्मेदारियों के लिए उन्हें बेहतर तरीके से तैयार करना है।

3 साल की प्रैक्टिस जरूरी

नए नियम के तहत न्यायिक सेवा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित अवधि तक वकील के रूप में कानूनी प्रैक्टिस करनी होगी। इसके बाद ही वे संबंधित न्यायिक सेवा भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र माने जाएंगे।

व्यावहारिक अनुभव पर जोर

सरकार का मानना है कि अदालतों में वास्तविक मामलों की प्रक्रिया और कानूनी कार्यवाही का अनुभव न्यायिक अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण है। प्रैक्टिस की अनिवार्यता से उम्मीदवारों को कानून की व्यावहारिक समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

न्यायिक सेवा भर्ती पर पड़ेगा असर

इस बदलाव के बाद नए कानून स्नातकों को न्यायिक सेवा परीक्षा में सीधे आवेदन करने के बजाय पहले निर्धारित अवधि तक प्रैक्टिस करनी होगी। इससे न्यायिक सेवा की तैयारी करने वाले कानून के छात्रों और युवा वकीलों की रणनीति पर असर पड़ सकता है।

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