13 अगस्त, 2026 : आनंदपुर साहिब स्थित श्री दशमेश अकादमी की प्रिंसिपल सोनू वालिया के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी पीएचडी डिग्री जमा करने और अपनी शैक्षणिक योग्यता को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के आरोप में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। मामला आनंदपुर साहिब पुलिस थाने में दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, सोनू वालिया पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में आरोपित घटनाओं की अवधि 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2024 के बीच बताई गई है।
यह मामला बिंदु शर्मा और अन्य लोगों की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में प्रिंसिपल की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल उठाए गए थे। शिकायत के आधार पर पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद रोपड़ के डिप्टी कमिश्नर आदित्य डचलवाल ने एक जांच समिति गठित की।
जांच समिति की अध्यक्षता रोपड़ के एसपी ने की। समिति में जिला शिक्षा अधिकारी, आनंदपुर साहिब के एसडीएम और डीएसपी को शामिल किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट रोपड़ के एसएसपी मनिंदर सिंह को सौंपी, जिसके बाद एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रिंसिपल ने अपने रिज्यूमे या सीवी में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से कैंसर साइटोजेनेटिक्स में पीएचडी होने का उल्लेख किया था। हालांकि, योग्यता के सत्यापन के दौरान इस डिग्री की प्रामाणिकता को लेकर सवाल सामने आए।
शिकायत के अनुसार, कुछ रिकॉर्ड में उनकी योग्यता को पूर्ण पीएचडी के रूप में दर्शाया गया था, जबकि अन्य दस्तावेजों में इसे “PhD – Pursuing” बताया गया था। इसी अंतर के आधार पर उनकी शैक्षणिक योग्यता और पद के लिए पात्रता की जांच शुरू हुई।
जांच के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी), रोपड़ की ओर से स्कूल प्रबंधन से संबंधित शैक्षणिक प्रमाणपत्र और रिकॉर्ड मांगे गए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके बाद अंतिम कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया।
मामले में अकादमी के प्रशासन और संचालन से जुड़ी कुछ अन्य कथित अनियमितताओं की भी जांच का उल्लेख किया गया है। शिक्षा मंत्री की ओर से विशेष ऑडिट और जांच के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब कथित फर्जी डिग्री और संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेगी।
शिकायतकर्ता ने जांच के दौरान मूल शैक्षणिक और पात्रता प्रमाणपत्रों, नियुक्ति एवं सेवा रिकॉर्ड, संबंधित पत्राचार, संस्थागत दस्तावेजों और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने की मांग की है। इसका उद्देश्य जांच के दौरान किसी भी रिकॉर्ड में बदलाव या उसके नष्ट होने की संभावना को रोकना बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, प्रिंसिपल सोनू वालिया को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन बंद था।
