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पंजाब के 16 गांवों में बाढ़ के एक साल बाद भी बीस नदी का डर बरकरार

13 अगस्त, 2026 :  पंजाब के कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी क्षेत्र के 16 गांवों में पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ के एक साल बाद भी लोगों की चिंता खत्म नहीं हुई है। ब्यास नदी के किनारे बसे इन गांवों के निवासी अब भी आशंकित हैं कि यदि नदी का जलस्तर फिर बढ़ा या अस्थायी बांध कमजोर पड़े, तो 2025 जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था के बिना हर मानसून उनके लिए डर लेकर आता है।

2025 में ब्यास नदी के जलस्तर में तेज बढ़ोतरी के बाद सुल्तानपुर लोधी के मंड क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। अस्थायी बांध में करीब 100 फुट की दरार पड़ने के बाद बाढ़ का पानी कई गांवों और खेतों में फैल गया था। 16 गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा और बड़ी मात्रा में धान की फसल पानी में डूब गई थी।

बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में बाऊपुर कदीम, बाऊपुर जदीद, संगरा सहित कई गांव शामिल हैं। इस क्षेत्र को ब्यास से घिरा हुआ द्वीप जैसा इलाका भी कहा जाता है। पिछले साल बाढ़ के दौरान करीब 5,000 लोगों को प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलना पड़ा था। कई जगहों पर खेतों में कई फीट पानी भर गया था और किसानों की खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ था।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल की तबाही के बाद स्थायी सुरक्षा उपायों की जरूरत और भी स्पष्ट हो गई थी। उनका मानना है कि केवल अस्थायी बांध और मानसून के दौरान की जाने वाली मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। ब्यास नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने पर अस्थायी संरचनाओं के टूटने का खतरा बना रहता है।

पंजाब सरकार ने भी पिछले साल बाढ़ के बाद इस क्षेत्र के लिए स्थायी समाधान का आश्वासन दिया था। 31 अगस्त 2025 को पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा ने बाऊपुर और संगरा का दौरा किया था। उन्होंने 16 गांवों वाले बाऊपुर द्वीप क्षेत्र को भविष्य में बाढ़ से बचाने के लिए स्थायी समाधान तलाशने की बात कही थी।

हालांकि, ग्रामीणों की मुख्य मांग अब भी स्थायी तटबंध और मजबूत बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था की है। उनका कहना है कि जब तक ब्यास के किनारे स्थायी और मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार नहीं होता, तब तक हर बारिश के मौसम में उन्हें अपने घरों, पशुओं और फसलों की चिंता बनी रहेगी।

पिछली बाढ़ के दौरान प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के लिए नावें उपलब्ध कराई थीं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था और राहत केंद्र भी बनाए गए थे। प्रशासन की ओर से सूखा राशन, पशुओं के लिए हरा चारा, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी।

बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा था। हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हुई और किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा। कुछ किसानों ने बाद में खेतों से रेत और गाद हटाने के लिए बड़े स्तर पर खुद प्रयास किए। अक्टूबर 2025 में करीब 150 ट्रैक्टरों की मदद से मंड क्षेत्र में गाद हटाने का अभियान चलाया गया था।

ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने का खतरा मुख्य रूप से ऊपरी इलाकों में भारी बारिश और पोंग बांध से पानी छोड़े जाने के दौरान बढ़ जाता है। अगस्त 2025 में भारी बारिश के बाद पोंग बांध से पानी छोड़े जाने के कारण ब्यास में जलस्तर तेजी से बढ़ा था, जिसके बाद कपूरथला और होशियारपुर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया था।

सुल्तानपुर लोधी के इन 16 गांवों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनका भौगोलिक क्षेत्र ब्यास नदी के बेहद करीब है। इसलिए नदी में अचानक पानी बढ़ने पर लोगों के पास सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सीमित समय होता है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन मानसून से पहले ही तटबंधों की मजबूती, जल निकासी और बचाव व्यवस्था की व्यापक तैयारी करे।

एक साल बाद भी ग्रामीणों की मांग यही है कि पिछले साल की बाढ़ से मिले सबक को ध्यान में रखते हुए स्थायी बाढ़ सुरक्षा योजना लागू की जाए। उनका कहना है कि राहत कार्य बाढ़ आने के बाद शुरू करने के बजाय पहले से ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे पानी गांवों तक पहुंच ही न सके।

फिलहाल, 16 गांवों के लोगों के लिए ब्यास नदी सिर्फ जीवन और खेती का स्रोत नहीं, बल्कि मानसून के दौरान संभावित खतरे का कारण भी बनी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सरकार स्थायी तटबंध और अन्य सुरक्षा उपायों पर तेजी से काम करेगी, ताकि 2025 जैसी बाढ़ की त्रासदी दोबारा न दोहराई जाए।

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