13 अगस्त, 2026 : कनाडा के कैलगरी में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के प्रदर्शन स्थल पर Canada Border Services Agency (CBSA) के अधिकारियों के पहुंचने और इमिग्रेशन दस्तावेजों की जांच करने की खबर सामने आई है। प्रदर्शन में 1,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ग्रेजुएट शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या पंजाब के छात्रों की है।
प्रदर्शनकारी पिछले करीब 10 दिनों से सड़कों पर प्रदर्शन और चेन हंगर स्ट्राइक कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कनाडा में ऐसे पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था, जिन्हें पूरा करने के बाद वे PGWP के लिए योग्य होने की उम्मीद कर रहे थे। बड़ी संख्या में आवेदन खारिज होने के बाद छात्रों ने अपने मामलों की दोबारा समीक्षा की मांग उठाई है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, CBSA अधिकारियों ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर कुछ प्रतिभागियों के इमिग्रेशन दस्तावेजों की जांच की। CBSA कनाडा में इमिग्रेशन कानूनों को लागू करने, संभावित उल्लंघनों की जांच करने और संबंधित मामलों में कार्रवाई करने वाली एजेंसी है।
इस पूरे विवाद का एक हिस्सा पंजाब के जालंधर स्थित एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी से भी कथित रूप से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रभावित छात्रों का कहना है कि उन्होंने कनाडा में पढ़ाई के लिए बड़ी रकम खर्च की और उन्हें उम्मीद थी कि उनका कोर्स पूरा होने के बाद वे पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट हासिल कर सकेंगे।
PGWP कनाडा में योग्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कनाडा में काम करने का अवसर देता है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई और भविष्य की योजना इसी उम्मीद के आधार पर बनाई थी कि उनके कार्यक्रम उन्हें वर्क परमिट के लिए योग्य बनाएंगे।
दूसरी ओर, Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) ने जून 2026 में कहा था कि गैर-क्रेडिट कार्यक्रमों से संबंधित पात्रता आवश्यकताओं में किया गया अपडेट मौजूदा नियमों को स्पष्ट करता है और PGWP की मूल पात्रता शर्तों में कोई बुनियादी बदलाव नहीं करता।
प्रदर्शनकारी इस स्पष्टीकरण से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्होंने उस समय उपलब्ध जानकारी और अपने सलाहकारों की सलाह के आधार पर ईमानदारी से दाखिला लिया था। अब वे चाहते हैं कि उनके आवेदनों को व्यक्तिगत परिस्थितियों और उस समय उपलब्ध जानकारी को ध्यान में रखते हुए दोबारा देखा जाए।
कैलगरी में चल रहा प्रदर्शन अब केवल वर्क परमिट आवेदन खारिज होने का मामला नहीं रह गया है। इसने कनाडा की इमिग्रेशन व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की स्थिति और विदेशी शिक्षा के लिए बड़ी रकम खर्च करने वाले भारतीय परिवारों की चिंताओं को भी सामने ला दिया है।
पंजाब के हजारों परिवार हर वर्ष अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजते हैं। ऐसे में PGWP से जुड़े इस विवाद का पंजाब पर विशेष प्रभाव पड़ रहा है। प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों का कहना है कि उन्होंने शिक्षा, फीस, रहने और अन्य खर्चों पर बड़ी रकम लगाई है और अब वर्क परमिट नहीं मिलने से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि कनाडाई अधिकारी उनके मामलों की समीक्षा करें और उन छात्रों को राहत दी जाए, जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्क परमिट के लिए आवेदन किया था। छात्रों की ओर से प्रशासनिक समीक्षा और कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
इस मामले ने अल्बर्टा सरकार और कनाडाई इमिग्रेशन अधिकारियों का भी ध्यान आकर्षित किया है। प्रदर्शनकारी अपने मामलों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं और चाहते हैं कि सरकार उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाले।
फिलहाल, कैलगरी में छात्रों का प्रदर्शन जारी है और CBSA की जांच के बाद मामला और गंभीर चर्चा में आ गया है। प्रभावित भारतीय और खासकर पंजाबी छात्रों की नजर अब कनाडाई अधिकारियों के अगले कदम और उनके PGWP आवेदनों की संभावित समीक्षा पर है।
