13 अगस्त, 2026 : पंजाब सरकार ने राजस्थान को नदी के पानी के इस्तेमाल के बदले 1.44 लाख करोड़ रुपये के कथित बकाये का भुगतान करने के लिए 30 दिन का अंतिम नोटिस जारी किया है। सरकार ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
पंजाब सरकार का दावा है कि राजस्थान ने 1961 से 2025 तक पंजाब से प्राप्त नदी जल के लिए रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया है। पंजाब ने इस दावे का आधार 4 सितंबर 1920 को शिमला में हुए एक ऐतिहासिक जल समझौते को बताया है, जिसमें तत्कालीन पंजाब, बहावलपुर और बीकानेर के शासक शामिल थे।
पंजाब सरकार के अनुसार, इस समझौते के तहत राजस्थान क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराया जाता रहा और इसके लिए भुगतान की व्यवस्था थी। सरकार का कहना है कि राजस्थान ने 1960 तक पानी की रॉयल्टी का भुगतान किया, लेकिन इसके बाद भुगतान बंद हो गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मार्च 2026 में भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि 1960 से 2026 तक की गणना के आधार पर राजस्थान पर 1.44 लाख करोड़ रुपये की राशि बकाया है।
पंजाब की ओर से राजस्थान सरकार के जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि पहले भी इस मुद्दे को लेकर पत्राचार किया गया था। पंजाब सरकार ने 18 मार्च और 4 मई को भी राजस्थान को इस संबंध में पत्र भेजे थे, लेकिन उसके अनुसार अपेक्षित भुगतान नहीं किया गया। अब सरकार ने इसे अंतिम मांग नोटिस के रूप में आगे बढ़ाया है।
इस मामले में पंजाब सरकार का तर्क है कि राजस्थान अभी भी ऐतिहासिक व्यवस्था के तहत पंजाब से पानी प्राप्त कर रहा है, इसलिए पानी के इस्तेमाल से जुड़े पुराने वित्तीय दावे पर भी विचार किया जाना चाहिए। मार्च में मुख्यमंत्री मान ने कहा था कि राजस्थान या तो पंजाब के कथित बकाये का भुगतान करे या फिर पानी लेने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए।
हालांकि, यह मामला केवल दो राज्यों के बीच वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं है। पंजाब और राजस्थान के बीच नदी जल के बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। पंजाब सरकार ने ऐतिहासिक समझौते की समीक्षा की मांग भी उठाई है।
पंजाब सरकार ने समानांतर रूप से हरियाणा से भी बकाये की मांग की है। मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव के अनुसार, हरियाणा से भाखड़ा नहर प्रणाली में साझा कैरियर चैनलों के संचालन और रखरखाव के लिए 312.59 करोड़ रुपये की राशि मांगी गई है। इसमें भाखड़ा मेन लाइन डिवीजन और मानसा डिवीजन से संबंधित रकम शामिल है।
राजस्थान को भेजे गए नए नोटिस के बाद अब विवाद के कानूनी रास्ते पर जाने की संभावना बढ़ गई है। पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि 30 दिनों के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तो वह कानूनी कार्यवाही शुरू करने पर विचार करेगी।
हालांकि, 1.44 लाख करोड़ रुपये की राशि पंजाब सरकार द्वारा किया गया दावा है और इसे राजस्थान सरकार द्वारा स्वीकार किया गया बकाया नहीं माना जा सकता। इस दावे की वैधानिकता, 1920 के समझौते की वर्तमान स्थिति और 1960 के बाद पानी के उपयोग पर भुगतान की देनदारी जैसे मुद्दों पर आगे कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
इस घटनाक्रम से पंजाब और राजस्थान के बीच जल विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब राजस्थान सरकार के जवाब और पंजाब सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी
