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रात 1:42 बजे बैंक खाते पर साइबर हमला, बिना OTP पैसे उड़ाए, सुरक्षा पर उठे सवाल

अमृतसर 26 अप्रैल 2026 शहर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अब जालसाजों ने बैंकिंग प्रणाली को सीधी चुनौती देनी शुरू कर दी है। ताजा मामले में बिना ओटीपी के ही रात के समय एक बैंक खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शनों के जरिए लगभग 46 हजार रुपये उड़ा लिए गए। हैरानी की बात यह है कि ट्रांजेक्शन होने के बाद संबंधित बैंक की ओर से करीब रात 2 बजे फोन करके जानकारी दी गई, जिससे बैंक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

पीड़ित विवेक तलवाड़ ने बताया कि उसका खाता काफी पुराना है और वह इसमें कम ही लेन-देन करता है। 24 अप्रैल की रात जब वह घर पर आराम कर रहा था, तभी जालसाजों ने उसके खाते को निशाना बनाया और लगातार तीन ट्रांजेक्शन कर दिए। विवेक तलवाड़ के अनुसार सबसे पहले रात 1:42 बजे 21,500 रुपये काटे गए। इसके करीब 10 मिनट बाद दूसरी बार 21,750 रुपये और निकाल लिए गए। इसके बाद भी ठग नहीं रुके और 1:56 बजे 2,000 रुपये की तीसरी ट्रांजेक्शन कर दी गई। कुल मिलाकर लगभग 45,250 रुपये की रकम खाते से गायब हो गई।

ट्रांजेक्शन के बाद आया बैंक का फोन 

तलवाड़ के अनुसार सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि ये सारी ट्रांजेक्शन होने के बाद संबंधित बैंक की ओर से करीब रात 2 बजे फोन किया गया, लेकिन देर रात होने के कारण वह फोन नहीं उठा सके। इससे सवाल उठता है कि यदि बैंक को संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी थी, तो पहले ही कदम क्यों नहीं उठाए गए?

न ओटीपी दिया, न कोई जानकारी — पीड़ित 

विवेक तलवाड़ ने स्पष्ट किया कि उसने किसी के साथ अपना ओटीपी, पासवर्ड या अन्य बैंकिंग जानकारी साझा नहीं की। उनका कहना है कि ये लेन-देन उनकी अनुमति के बिना हुए हैं, जो बैंकिंग सुरक्षा में बड़ी खामी को दर्शाता है। सुबह जब पीड़ित ने खाते की जांच की तो रकम गायब देखकर उसके होश उड़ गए। इसके बाद उसने तुरंत बैंक से संपर्क किया और मामले की शिकायत साइबर क्राइम सेल अमृतसर में दर्ज करवा दी।

लोगों में डर, प्रणाली पर भरोसा हिला 

समाज सेवक रजिंदर शर्मा ने कहा कि इस घटना के बाद आम लोगों में डर का माहौल है। शर्मा का कहना है कि अगर बिना ओटीपी के ही पैसे निकलने लगें और बैंक बाद में सिर्फ फोन कर जानकारी दे, तो फिर सुरक्षा का क्या लाभ? उन्होंने कहा कि जालसाज क्लोनिंग, फिशिंग या डाटा लीक जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार मालवेयर के जरिए भी खाते की जानकारी चोरी हो सकती है, जिससे बिना ओटीपी के लेन-देन संभव हो जाते हैं।

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