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पंजाब में स्कूलों के समय में बदलाव की मांग, भीषण गर्मी के बीच अभिभावकों की अपील

लुधियाना 23 अप्रैल 2026 : पंजाब में अप्रैल के महीने में ही सूर्य देवता के कड़े तेवरों ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। आसमान से बरसती आग और भीषण हीट वेव (लू) के प्रकोप का सबसे घातक असर स्कूली विद्यार्थियों, विशेषकर सरकारी स्कूलों के बच्चों पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए शिक्षा विभाग के डायरैक्टर जनरल स्कूल शिक्षा (डी.जी.एस.ई.) द्वारा सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं।

विभाग ने नैशनल डिजास्टर मैनेजमैंट अथॉरिटी (एन.डी.एम.ए.) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए सभी स्कूलों को आदेश दिया है कि वे विद्यार्थियों को सुबह की सभा और क्लासरूम में लू से बचाव के प्रति जागरूक करें। लेकिन धरातल पर सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। बढ़ती गर्मी और बच्चों की गिरती सेहत को देखते हुए अभिभावकों और अध्यापक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि स्कूलों का समय तुरंत बदला जाए। अभिभावकों की स्पष्ट मांग है कि स्कूलों का समय बदलकर सुबह 7 से 11 बजे तक किया जाए। उनका तर्क है कि 11 बजे के बाद धूप असहनीय हो जाती है, जिससे बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता और वे बीमार पड़ने लगते हैं।

बिजली कटों ने निकाली बच्चों की जान, सुविधाओं का भारी अभाव
शहर 
और ग्रामीण इलाकों में लग रहे लंबे-लंबे बिजली के कटों ने क्लासरूम को भट्टी बना दिया है। यहां निजी और सरकारी स्कूलों के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है। निजी स्कूलों में जैनरेटर और भारी-भरकम इन्वर्टर की सुविधा होने के कारण बच्चों को कुछ राहत मिल जाती है लेकिन अधिकतर सरकारी स्कूलों में जैनरेटर न होने के कारण बच्चे उमस और पसीने में तपने को मजबूर हैं। सबसे गंभीर समस्या पानी की है। बिजली गुल होते ही स्कूलों की मोटरें बंद हो जाती हैं जिससे वाटर कूलर महज दिखावा बन जाते हैं और बच्चों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

साइकिल पर आने वाले विद्यार्थियों के लिए जानलेवा हुई दोपहर
सरकारी
 स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर विद्यार्थी मध्यम या निम्न आय वर्ग के परिवारों से हैं, इनमे से कई इद्यार्थी ऐसे हैं जो कई किलोमीटर का सफर साइकिल पर तय करके स्कूल पहुंचते हैं। दोपहर के समय जब स्कूल की छुट्टी होती है तो लू के थपेड़े बच्चों को बुरी तरह झुलसा देते हैं। चिलचिलाती धूप में साइकिल चलाकर घर वापस लौटते समय बच्चों में बेहोशी, चक्कर आने और नाक से खून बहने (नकसीर) की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। अभिभावकों का कहना है कि दोपहर 2 बजे तक बच्चों को स्कूल में रखना उनकी जान जोखिम में डालने जैसा है।

स्वास्थ्य और उपस्थिति पर बुरा प्रभाव
भीषण
 गर्मी का सीधा असर बच्चों की सेहत और स्कूल में उनकी उपस्थिति पर पड़ रहा है। लुधियाना के कई स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति में गिरावट दर्ज की गई है। डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों का शरीर अत्यधिक तापमान झेलने के लिए तैयार नहीं होता जिससे वे जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। बच्चे कापियों से हवा करने को मजबूर हैं।

ऐसे करें गर्मी से बचाव सुझाव

प्रसिद्ध माहिर डॉ. तनवीर सिंह भुटानी ने विद्यार्थियों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि हीट वेव बच्चों के नाजुक शरीर पर गहरा असर डाल सकती है। उन्होंने बचाव के निम्नलिखित उपाय साझा किए हैं।

• डिहाइड्रेशन से बचने के लिए प्यास का इंतजार न करें और अंतराल पर पानी पीते रहें।

• स्कूल से आते-जाते समय सिर को ढककर रखें। इसके लिए गीला कपड़ा, टोपी या छाते का इस्तेमाल सबसे बेहतर है।

• कभी भी खाली पेट स्कूल न निकलें। घर का ताजा खाना खाएं और तरल पदार्थ जैसे ओ.आर.एस., शिकंजी या लस्सी को अपनी डाइट में शामिल करें।

• गर्मी में गहरे रंग के कपड़े ऊष्मा सोखते हैं, इसलिए बच्चों को केवल हल्के रंग के सूती कपड़े ही पहनाएं।

• अगर बच्चे को अधिक सुस्ती, तेज सिरदर्द या उल्टी जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें।

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