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पूर्व पंजाब मंत्री के पिता और PA को हाईकोर्ट से झटका, आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अग्रिम जमानत खारिज

20 सितंबर, 2026 :  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के पूर्व परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और मंत्री के निजी सहायक दिलबाग सिंह उर्फ बागा को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मामला पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या से जुड़ा है।

जस्टिस अमन चौधरी ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपों की गंभीरता, जांच की स्थिति और संभावित सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तारी से पहले जमानत की सुरक्षा देना जांच को प्रभावित कर सकता है।

टेंडर को लेकर विवाद का मामला

हाईकोर्ट के सामने रखे गए रिकॉर्ड के अनुसार, सुखदेव सिंह भुल्लर एक टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुए थे। यह टेंडर M/s Baba Naga Agro Private Limited को आवंटित किया गया था।

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोप है कि गगनदीप सिंह रंधावा पर इस टेंडर को रद्द कर सुखदेव सिंह भुल्लर के नाम दोबारा आवंटित करने का दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि, ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अदालत ने इन्हें अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में घोषित नहीं किया है।

घर में वीडियो बनाए जाने का भी जिक्र

हाईकोर्ट के आदेश में 13 मार्च की एक कथित घटना का भी उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर अदालत ने रिकॉर्ड किया कि कथित तौर पर मंत्री के घर पर एक वीडियो तैयार किया गया था।

अदालत ने कहा कि जांच के दौरान वीडियो में दिखाई देने वाला सोफा सेट और पर्दे मुख्य आरोपी के आवास के एक कमरे में मौजूद सामान से मेल खाते पाए गए। यह तथ्य जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के संदर्भ में अदालत के आदेश में दर्ज किया गया है।

मृतक पर रिश्वत कबूल करने का दबाव लगाने का आरोप

जस्टिस अमन चौधरी ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि मृतक को कथित तौर पर रिश्वत लेने की बात कबूल करने के लिए मजबूर किया गया और उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप है।

एक गवाह के हवाले से अदालत के रिकॉर्ड में कहा गया कि गगनदीप सिंह रंधावा ने अमृतसर लौटते समय कथित तौर पर बताया था कि उसे धमकियां दी गई थीं और टेंडर को सुखदेव सिंह भुल्लर के नाम दोबारा आवंटित करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था।

रिकॉर्ड के अनुसार, इस अवधि के समाप्त होने के तुरंत बाद 21 मार्च को गगनदीप सिंह रंधावा ने आत्महत्या कर ली। इन घटनाओं को अदालत ने मामले की जांच और आरोपों की गंभीरता के संदर्भ में देखा है।

कोर्ट ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत?

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है। अदालत के अनुसार, कथित तौर पर हटाए गए DVR, पिस्तौल और मोबाइल फोन की बरामदगी अभी बाकी है।

इसके अलावा, जांच के दौरान गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई गई थी। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की हिरासत में पूछताछ को जरूरी बताया।

हाईकोर्ट ने माना कि इस स्थिति में आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए अदालत ने दोनों याचिकाओं में पर्याप्त आधार नहीं पाया और उन्हें खारिज कर दिया।

मामले में आगे क्या होगा?

अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद अब जांच एजेंसी के सामने मामले की जांच को आगे बढ़ाने की स्थिति है। खास तौर पर DVR, मोबाइल फोन और पिस्तौल की कथित बरामदगी तथा मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

इसके साथ ही जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना है कि घटना के दौरान कौन-कौन लोग मौजूद थे और टेंडर से जुड़े विवाद तथा मृतक की आत्महत्या के बीच कथित संबंध की वास्तविक स्थिति क्या थी।

आरोपों की जांच जारी

यह पूरा मामला अभी न्यायिक और जांच प्रक्रिया के अधीन है। हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश अग्रिम जमानत से संबंधित है और इसमें दर्ज आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले में जांच पूरी होने और आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही आरोपों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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