20 सितंबर, 2026 : पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले के समापन अवसर पर किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ हाई-वैल्यू फसलों, वैल्यू एडिशन और एग्री-उद्यमिता को अपनाने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों से खेती को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और सीधे बाजार से जुड़ने पर भी ध्यान देने का आह्वान किया।
किसान मेले का आयोजन PAU के डायरेक्टोरेट ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन की ओर से किया गया। इस बार मेले की थीम वैज्ञानिक खेती के माध्यम से कृषि आय बढ़ाने पर केंद्रित रही। मेले में किसानों को PAU के वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों और कृषि उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का अवसर मिला।
हाई-वैल्यू फसलों को अपनाने पर जोर
समापन समारोह में पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन हरचंद सिंह बरसट ने किसानों से ऐसी फसलों और कृषि गतिविधियों की ओर बढ़ने की अपील की, जिनसे उन्हें अधिक व्यावसायिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि सही तकनीक और उचित तरीके अपनाकर खेती के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर आर्थिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने किसानों को पानी का समझदारी से इस्तेमाल करने और धान की पराली जलाने से बचने की भी अपील की। उनके अनुसार, खेती में ऐसी तकनीकों को अपनाना जरूरी है जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मदद करें।
खेती से उद्यमिता की ओर बढ़ने की सलाह
PAU के कुलपति सुखजीत पाल सिंह ने किसानों से किसान मेले में मिली जानकारी, वैज्ञानिक सलाह और तकनीकों को खेतों में लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सफल खेती के लिए सही फसल, सही किस्म, सही समय और सही तकनीक का तालमेल जरूरी है।
उन्होंने किसानों से केवल प्राथमिक उत्पादक बने रहने के बजाय उद्यमी सोच विकसित करने की अपील की। प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, वैल्यू एडिशन और सीधे मार्केटिंग के जरिए किसान अपने उत्पाद की कीमत में अधिक हिस्सा हासिल कर सकते हैं। इससे किसान खेत से बाजार तक की पूरी वैल्यू चेन में अपनी भूमिका मजबूत कर सकते हैं।
पानी बचाने वाली तकनीकों पर भी चर्चा
किसान मेले में भूजल संरक्षण को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रखा गया। PAU विशेषज्ञों ने किसानों को पानी की बचत करने वाली तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
धान की खेती में डायरेक्ट सीडेड राइस यानी DSR को पानी की बचत करने वाली महत्वपूर्ण तकनीक के रूप में बताया गया। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ऐसी कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई, जिससे लंबे समय तक खेती को टिकाऊ बनाया जा सके।
पराली को कचरा नहीं, संसाधन मानने की अपील
किसान मेले में धान की पराली के प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया गया। PAU के कुलपति ने पराली को केवल कृषि अवशेष या कचरा मानने के बजाय आर्थिक संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर जोर दिया।
उन्होंने किसानों को इन-सिटू फसल अवशेष प्रबंधन के साथ-साथ बायोगैस उत्पादन और बेलिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी। इससे पराली जलाने की समस्या को कम करने के साथ-साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
महिलाओं को भी कृषि आधारित व्यवसाय से जुड़ने की सलाह
किसान मेले में खेती से जुड़े सहायक व्यवसायों को भी आय बढ़ाने का माध्यम बताया गया। हरचंद सिंह बरसट ने विशेष रूप से किसानों के परिवारों की महिलाओं को डेयरी फार्मिंग, सुअर पालन, बकरी पालन और मशरूम उत्पादन जैसे व्यवसायों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इन गतिविधियों के जरिए ग्रामीण परिवारों के लिए खेती के अलावा आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। इससे कृषि आधारित परिवारों की आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
किसान मेले में नई तकनीक और बीज रहे आकर्षण का केंद्र
PAU के किसान मेले में किसानों के लिए बेहतर बीज और पौध सामग्री, कृषि मशीनरी, फील्ड डेमोंस्ट्रेशन और एग्रो-इंडस्ट्रियल प्रदर्शनी प्रमुख आकर्षण रहे। किसानों ने वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों से खेती की नई तकनीकों और फसलों से जुड़े सवालों पर जानकारी हासिल की।
मेले में किसानों को नई फसल किस्मों, कृषि तकनीकों और वैल्यू एडेड उत्पादों के बारे में भी जानकारी दी गई। पहले दिन ही बड़ी संख्या में किसानों ने मेले में पहुंचकर बीज और अन्य कृषि सामग्री की जानकारी ली।
किसानों को बाजार से सीधे जुड़ने की जरूरत
विशेषज्ञों ने किसानों को केवल फसल उगाने तक सीमित न रहने की सलाह दी। कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और सीधे मार्केटिंग से किसान अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।
इस तरह किसान उत्पादन के साथ-साथ कृषि व्यवसाय की अन्य गतिविधियों में भी अपनी भागीदारी बढ़ा सकते हैं। PAU किसान मेले में वैज्ञानिक खेती के साथ इसी तरह की उद्यमशील सोच को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
बड़े स्तर पर पहुंचा किसान मेला
दो दिवसीय PAU किसान मेले में पंजाब और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, समापन दिवस पर 80 हजार से अधिक किसानों की मौजूदगी रही और दो दिनों में कुल संख्या 2.1 लाख से अधिक पहुंच गई।
