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लुधियाना में पशु पालन मेले का समापन, पशु फार्मों में बेहतर बायो-सिक्योरिटी पर जोर

20 सितंबर, 2026 :  गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (GADVASU) में आयोजित दो दिवसीय पशु पालन मेले का शनिवार को समापन हो गया। मेले के अंतिम दिन पशुपालकों और किसानों को पशु फार्मों में बेहतर बायो-सिक्योरिटी उपाय अपनाने और पशु रोगों की रोकथाम पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया गया। मेले में बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया और पशुपालन से जुड़ी नई तकनीकों और आधुनिक तरीकों के बारे में जानकारी हासिल की।

पशु फार्मों में बायो-सिक्योरिटी पर जोर

इस बार पशु पालन मेले का मुख्य संदेश पशु फार्मों में बायो-सिक्योरिटी को मजबूत करना रहा। बायो-सिक्योरिटी का उद्देश्य पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाना और फार्म में बीमारी के फैलाव की संभावना को कम करना है।

GADVASU की ओर से मेले का आयोजन “Strengthen the Biosecurity — Prevent Animal Diseases” थीम के तहत किया गया था। विश्वविद्यालय ने किसानों को पशुओं के स्वास्थ्य और फार्म प्रबंधन से जुड़ी सावधानियों के बारे में जागरूक किया।

बड़ी संख्या में किसानों ने लिया हिस्सा

दो दिवसीय मेले में बड़ी संख्या में किसानों और पशुपालकों ने भाग लिया। किसानों ने विभिन्न स्टॉलों पर पहुंचकर पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी तकनीकों की जानकारी ली।

मेले में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों के साथ बातचीत की और उन्हें व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई। प्रदर्शनी, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और विशेषज्ञों के साथ संवाद के जरिए किसानों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों से परिचित कराया गया।

100 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए

मेले में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के साथ-साथ पंजाब सरकार के विभागों, दवा और मशीनरी कंपनियों तथा अन्य संस्थानों ने 100 से अधिक स्टॉल लगाए। इन स्टॉलों पर पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से संबंधित उत्पादों, तकनीकों और सेवाओं को प्रदर्शित किया गया।

किसानों को बेहतर पशु आहार, संतुलित फीडिंग, मिनरल मिक्सचर और बायपास फैट जैसी तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके अलावा कृत्रिम गर्भाधान के फायदे और पशु उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई।

पशु स्वास्थ्य और वन हेल्थ पर जागरूकता

मेले में पशु स्वास्थ्य के साथ-साथ वन हेल्थ को भी प्रमुखता दी गई। सेंटर फॉर वन हेल्थ की ओर से लोगों और पालतू पशुओं के मालिकों को उन बीमारियों के बारे में जागरूक किया गया, जो पशुओं से इंसानों में फैल सकती हैं।

विश्वविद्यालय के वेटरनरी अस्पताल के विशेषज्ञों ने भी किसानों को पशुओं में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और उपलब्ध चिकित्सकीय सेवाओं के बारे में जानकारी दी।

किसानों के लिए नए उत्पाद और तकनीकें पेश

पशु पालन मेले के दौरान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की ओर से विकसित कई उत्पाद और प्रकाशन भी जारी किए गए। इनमें डेयरी, पोल्ट्री, घोड़ा प्रबंधन, उद्यमिता, मछली पालन और पशुपालन से जुड़े विषयों पर सामग्री शामिल रही।

इसके अलावा मछली पालन में बायो-सिक्योरिटी और टिकाऊ कृषि से संबंधित जानकारी भी किसानों तक पहुंचाई गई। विश्वविद्यालय ने पशुपालन से जुड़े कारोबार और ग्रामीण उद्यमिता के नए अवसरों पर भी ध्यान दिया।

किसानों को अपनाने होंगे वैज्ञानिक तरीके

समापन समारोह में किसानों से पशुपालन में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने और विश्वविद्यालय की ओर से विकसित तकनीकों व उत्पादों का उपयोग करने का आग्रह किया गया।

राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत सिंह संधू समापन समारोह में मुख्य अतिथि रहे, जबकि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति सुखजीत पाल सिंह विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। संधू ने पशु चिकित्सा और इससे जुड़ी वैज्ञानिक शिक्षा के माध्यम से किसानों को ज्ञान उपलब्ध कराने में विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना की।

किसानों की प्रतिक्रिया को बताया महत्वपूर्ण

GADVASU के कुलपति डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने किसानों की प्रतिक्रिया को भविष्य के शोध और तकनीकी विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसानों को विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उत्पादों और तकनीकों को अपने फार्म पर अपनाने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने किसानों के सुझावों को भविष्य के काम और शोध के लिए उपयोगी बताया। विश्वविद्यालय का उद्देश्य वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद मजबूत करना है, ताकि खेत और पशु फार्म से जुड़ी वास्तविक समस्याओं के आधार पर नई तकनीकें और समाधान विकसित किए जा सकें।

पशुपालन से आय बढ़ाने पर भी ध्यान

मेले में पशुपालन को केवल पारंपरिक गतिविधि के रूप में देखने के बजाय इसे आय और ग्रामीण उद्यमिता के अवसर के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया। डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और अन्य पशुपालन गतिविधियों में नई तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर जानकारी दी गई।

विश्वविद्यालय की ओर से किसानों को पशु स्वास्थ्य, उत्पादन और फार्म प्रबंधन में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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