20 सितंबर, 2026 : भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब स्थित डेरा बाबा नानक रेलवे स्टेशन ने अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। सीमा क्षेत्र में एक सदी से महत्वपूर्ण रेलवे कड़ी के रूप में काम करने वाले इस स्टेशन का अब नया रूप देखने को मिल सकता है। इसे रेलवे म्यूजियम में बदलने की योजना पर काम किया जा रहा है।
100 साल पूरे होने पर आयोजित हुआ कार्यक्रम
डेरा बाबा नानक रेलवे स्टेशन की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन रेलवे और INTACH Punjab की ओर से संयुक्त रूप से किया गया था।
कार्यक्रम के दौरान स्टेशन के 100 साल के सफर को याद किया गया और इसके ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा हुई। यह स्टेशन भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है और इसे भारतीय सीमा की ओर अंतिम रेलवे स्टेशन के रूप में जाना जाता है।
कभी स्टेशन पर मंडरा रहा था तोड़ने का खतरा
डेरा बाबा नानक रेलवे स्टेशन के लिए एक समय ऐसा भी आया जब इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था। स्टेशन की इमारत को गिराए जाने की आशंका थी। ऐसे समय में INTACH Punjab ने हस्तक्षेप कर इसके ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प महत्व को सामने रखा।
INTACH के प्रयासों के बाद स्टेशन को हेरिटेज संरचना के रूप में शामिल किया गया। इससे इसके संरक्षण का रास्ता खुला और पुरानी इमारत को सुरक्षित रखने की दिशा में काम शुरू हुआ।
अब रेलवे म्यूजियम बनाने की योजना
स्टेशन को संरक्षित करने के बाद अब इसे रेलवे म्यूजियम में बदलने का प्रस्ताव सामने आया है। INTACH Punjab ने डेरा बाबा नानक स्टेशन की इमारत को रेलवे म्यूजियम के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे रेलवे की ओर से सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है।
अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो स्टेशन में पंजाब के सीमा क्षेत्र की रेलवे विरासत को प्रदर्शित किया जा सकेगा। साथ ही लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि पिछले 100 वर्षों में रेलवे ने इस क्षेत्र में आवागमन, व्यापार और संपर्क को किस तरह प्रभावित किया।
बंटवारे के इतिहास से भी जुड़ा स्टेशन
डेरा बाबा नानक रेलवे स्टेशन का इतिहास केवल रेलवे तक सीमित नहीं है। यह पंजाब के विभाजन के इतिहास से भी जुड़ा हुआ है। 1947 के विभाजन के दौरान पंजाब के कई रेलवे स्टेशन और रेल लाइनें बड़े पैमाने पर हुए पलायन की गवाह बनी थीं।
कार्यक्रम के दौरान स्टेशन पर लगाई गई फोटो प्रदर्शनी में इसके 100 साल के सफर की झलक दिखाई गई। प्रदर्शनी के जरिए स्टेशन के इतिहास और क्षेत्र में रेलवे की भूमिका को सामने रखा गया।
सीमा क्षेत्र में रेलवे की अहम कड़ी
डेरा बाबा नानक रेलवे स्टेशन पिछले एक शताब्दी से सीमा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण रेलवे लिंक रहा है। भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक होने के कारण इसका ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व भी अलग है।
स्टेशन ने बदलते समय के साथ क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और संपर्क में भूमिका निभाई। यही वजह है कि इसके संरक्षण को केवल एक पुरानी रेलवे इमारत को बचाने के तौर पर नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास को सुरक्षित रखने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
हेरिटेज स्टेशन के रूप में संरक्षण
स्टेशन को हेरिटेज संरचना का दर्जा मिलने के बाद इसकी पुरानी पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। अब म्यूजियम का प्रस्ताव इस संरक्षण को एक नई दिशा दे सकता है।
रेलवे म्यूजियम बनने की स्थिति में यहां रेलवे से जुड़े पुराने दस्तावेज, तस्वीरें और सीमा क्षेत्र के रेलवे इतिहास से जुड़ी सामग्री प्रदर्शित किए जाने की संभावना है। हालांकि, रिपोर्ट में म्यूजियम के अंतिम स्वरूप और विस्तृत कार्ययोजना की जानकारी नहीं दी गई है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास सुरक्षित करने की पहल
पुरानी रेलवे इमारतों को संरक्षित करना इतिहास को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक माध्यम है। डेरा बाबा नानक स्टेशन के मामले में इसकी ऐतिहासिक स्थिति, सीमा क्षेत्र से जुड़ाव और विभाजन की यादें इसे विशेष महत्व देती हैं।
100 साल पूरे होने के बाद अब रेलवे म्यूजियम के प्रस्ताव से इस स्टेशन को नई भूमिका मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय इतिहास और पंजाब की रेलवे विरासत को लोगों के सामने लाने का अवसर मिल सकता है।
