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अमृतसर के गांव की लाइब्रेरी जर्जर, गुरमुख सिंह की विरासत सरकारी उपेक्षा के बीच हो रही खत्म

12 अगस्त, 2026 :  अमृतसर के एक गांव में स्थापित लाइब्रेरी अब जर्जर हालत में पहुंच गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उचित देखरेख और प्रशासनिक ध्यान के अभाव में यह पुस्तकालय धीरे-धीरे अपनी उपयोगिता और पहचान खोता जा रहा है।

बताया जाता है कि यह लाइब्रेरी गुरमुख सिंह की विरासत से जुड़ी है और कभी ग्रामीणों, खासकर विद्यार्थियों और युवाओं के लिए पढ़ाई का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करती थी। समय के साथ रखरखाव की कमी के कारण भवन और पुस्तकालय की सुविधाओं की स्थिति खराब होती गई।

जर्जर हालत में पहुंची लाइब्रेरी

स्थानीय लोगों के अनुसार, लाइब्रेरी की इमारत में मरम्मत और रखरखाव की जरूरत है। पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में यहां आने वाले पाठकों की संख्या भी प्रभावित हुई है।

गुरमुख सिंह की विरासत बचाने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि लाइब्रेरी केवल किताबों का केंद्र नहीं, बल्कि गुरमुख सिंह की सामाजिक और शैक्षणिक सोच से जुड़ी विरासत है। उन्होंने प्रशासन से इसकी मरम्मत कराने और इसे दोबारा सक्रिय करने की मांग की है।

विद्यार्थियों को हो सकता है फायदा

स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर लाइब्रेरी का जीर्णोद्धार किया जाए और इसमें नई किताबें, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यह गांव के विद्यार्थियों और युवाओं के लिए फिर से उपयोगी अध्ययन केंद्र बन सकती है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द निरीक्षण कर लाइब्रेरी की स्थिति का आकलन करने और आवश्यक मरम्मत एवं संरक्षण कार्य शुरू कराने की अपील की है। लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत को उपेक्षा के कारण खत्म होने से बचाना जरूरी है।

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