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गणेशोत्सव में भाविकों ने छोड़े 8 टन जूते-चप्पल, अब जरूरतमंद बच्चों के आएंगे काम

28 सितंबर 2026  मुंबई के गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भक्तों द्वारा मंदिरों, गणपति पंडालों और जुलूस के रास्तों के आसपास छोड़े गए जूते-चप्पलों को अब कचरे के रूप में फेंका नहीं जाएगा। इस साल बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की टीमों ने गणेशोत्सव के दौरान करीब 8 टन जूते, चप्पल और अन्य पादत्राणे जमा किए हैं। इनका अब पुन: उपयोग और रिसाइक्लिंग किया जाएगा।

गणेशोत्सव के दौरान भारी भीड़ के कारण कई श्रद्धालु अपने जूते-चप्पल वहीं छोड़ देते हैं। पहले इस तरह जमा होने वाले पादत्राणों को अक्सर लैंडफिल में भेज दिया जाता था। इस बार इन्हें उपयोगी बनाने के लिए अलग पहल की गई है।

गणेशोत्सव के बाद जमा हुए करीब 8 टन पादत्राणे

BMC के वेस्ट मैनेजमेंट और सैनिटेशन कर्मचारियों ने पूरे गणेशोत्सव के दौरान लगभग 8 टन जूते-चप्पल जमा किए। इसमें करीब 4 टन पादत्राणे 29 अगस्त को गणपति मूर्तियों के आगमन से जुड़े जुलूसों के दौरान ही जमा हुए थे।

चिंचपोकली इलाके में आयोजित ‘चिंचपोकलीचा चिंतामणि’ गणपति के आगमन जुलूस के बाद भारतमाता जंक्शन, जिजाबाई लेन और चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के आसपास से बड़ी मात्रा में जूते-चप्पल इकट्ठा किए गए थे।

अब कचरे के बजाय जरूरतमंदों के काम आएंगे

BMC ने जमा किए गए पादत्राणों को GreenSole Foundation को सौंपा है। संस्था इन्हें साफ करने, सैनिटाइज करने और अलग-अलग हिस्सों में छांटने के बाद दोबारा इस्तेमाल करने की प्रक्रिया से गुजारेगी।

जो जूते-चप्पल उपयोग के लायक होंगे, उन्हें मरम्मत और रिफर्बिशमेंट के बाद दोबारा तैयार किया जाएगा। इसके बाद इन्हें महाराष्ट्र के जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।

इनमें BMC स्कूलों के बच्चों के साथ-साथ महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी शामिल किया जाएगा।

जूते-चप्पलों को कैसे दिया जाएगा नया रूप?

GreenSole की Bhiwandi स्थित सुविधा में जमा किए गए पादत्राणों को पहले हाथ से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसके बाद उन्हें धोकर सैनिटाइज किया जाएगा।

जूते और चप्पलों के ऊपरी हिस्से, सोल, लेस और दूसरे हिस्सों को अलग करके उनकी स्थिति जांची जाएगी। उपयोगी सोल और दूसरे हिस्सों को दोबारा जोड़कर नए या रिफर्बिश्ड फुटवियर तैयार किए जाएंगे।

इस प्रक्रिया के दौरान खराब या अनुपयोगी सामग्री को भी पूरी तरह बेकार नहीं किया जाएगा। कुछ सामग्री से स्कूल बैग और बैठने के लिए मैट जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

हर पादत्राणे का नहीं हो पाएगा इस्तेमाल

हालांकि, जमा किए गए सभी जूते-चप्पलों को दोबारा इस्तेमाल करना संभव नहीं होगा। GreenSole के अनुमान के अनुसार करीब 15 प्रतिशत सामग्री अवशेष या छोटे टुकड़ों के रूप में बच सकती है।

जूते-चप्पलों से निकलने वाले थर्मोप्लास्टिक रबर और थर्मोप्लास्टिक पॉलीयूरेथेन जैसे पदार्थों को ग्रैन्यूल में बदला जा सकता है। इनका इस्तेमाल ऑटोमोबाइल और फर्नीचर उद्योग सहित अन्य क्षेत्रों में किया जाता है।

लैंडफिल में जाने से भी बचेगा कचरा

BMC की इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य त्योहार के दौरान पैदा होने वाले कचरे को कम करना भी है। बड़ी संख्या में फेंके गए जूते-चप्पलों को सीधे लैंडफिल में भेजने के बजाय उनका पुन: उपयोग करने से कचरे की मात्रा कम की जा सकती है।

BMC अधिकारी के अनुसार, इस तरह की पहल से जरूरतमंद लोगों को फुटवियर उपलब्ध कराने के साथ-साथ कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से भी रोका जा सकता है।

GreenSole लंबे समय से कर रहा है फुटवियर अपसाइक्लिंग

GreenSole Foundation पिछले कई वर्षों से पुराने और इस्तेमाल किए गए फुटवियर को दोबारा उपयोगी बनाने के क्षेत्र में काम कर रही है। संस्था के अनुसार उसने अब तक 10 लाख से ज्यादा जोड़ी फुटवियर को प्रोसेस किया है।

संस्था पुराने फुटवियर को साफ करने, उनकी उपयोगी सामग्री को अलग करने और जरूरतमंद लोगों तक रिफर्बिश्ड फुटवियर पहुंचाने का काम करती है।

पर्यावरण के लिए भी उपयोगी पहल

गणेशोत्सव जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में लाखों लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे आयोजनों के बाद बड़ी मात्रा में कचरा भी जमा होता है। जूते-चप्पलों को रिसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग के लिए भेजना इसी कचरे को कम करने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है।

BMC और GreenSole की यह पहल धार्मिक आयोजन के बाद बची वस्तुओं को दोबारा इस्तेमाल में लाने का उदाहरण भी बन रही है।

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