25 सितंबर 2026 महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने आगामी चुनावों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से कराने की मांग की है। उन्होंने देश के सभी विपक्षी दलों से चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर एकजुट होकर आंदोलन करने का आह्वान किया। राज ठाकरे ने यह बयान 24 सितंबर 2026 को निर्वाचन आयोग को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच दिया।
निर्वाचन आयोग के कामकाज पर उठाए सवाल
राज ठाकरे ने हाल ही में सामने आई उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों द्वारा आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 10 महीनों के दौरान 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट से उनके और उनकी पार्टी की ओर से पहले उठाए गए सवालों को बल मिला है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। ठाकरे का आरोप है कि निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता प्रभावित हुई है और आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। हालांकि, ये राज ठाकरे द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
EVM को लेकर राज ठाकरे की मांग
राज ठाकरे ने कहा कि निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर उनकी पार्टी की लड़ाई के बाद अब अगला मुद्दा EVM का है। उन्होंने दावा किया कि आयोग की स्वायत्तता और EVM दोनों को लेकर विपक्षी दलों को व्यापक स्तर पर सवाल उठाने चाहिए।
उन्होंने देश के सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर जन आंदोलन शुरू करें।
विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील
राज ठाकरे ने कहा कि निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर पहली लड़ाई विपक्षी दलों को ज्यादा मजबूती और एकजुटता के साथ लड़नी चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर साथ आने का आह्वान किया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कई विपक्षी नेता निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
SIR और मतदाता सूची को लेकर भी विवाद
राज ठाकरे ने अपने बयान में SIR और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष की ओर से लंबे समय से सवाल उठाए जा रहे हैं।
इसी बीच, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों की ओर से आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हुई है।
कई विपक्षी नेताओं ने भी उठाए सवाल
EVM और निर्वाचन आयोग को लेकर राज ठाकरे के अलावा कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने भी हाल के दिनों में अलग-अलग मांगें रखी हैं। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव दोबारा बैलेट पेपर से कराने की मांग की थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी निर्वाचन आयोग के खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि, अलग-अलग नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े दावे राजनीतिक बयानों का हिस्सा हैं। इनके आधार पर किसी चुनाव में गड़बड़ी को स्वतः सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को भी दोहराया। उन्होंने निर्वाचन आयोग के कामकाज की जांच की मांग करते हुए कहा कि आयोग को स्वतंत्र और स्वायत्त तरीके से काम करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दलों को केवल अलग-अलग बयान देने के बजाय इस मुद्दे पर संयुक्त रूप से आगे बढ़ना चाहिए।
चुनाव व्यवस्था पर जारी बहस
EVM बनाम बैलेट पेपर का मुद्दा भारत में लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। मौजूदा विवाद में विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, जबकि इन मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने दावे हैं।
राज ठाकरे के ताजा बयान से यह बहस एक बार फिर तेज हुई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आगामी चुनावों को बैलेट पेपर से कराने की मांग करते हुए विपक्षी दलों से इसके लिए आंदोलन शुरू करने की अपील की है।
