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गुरुग्राम जलभराव पर सीएम सैनी ने कांग्रेस को ठहराया जिम्मेदार

28 सितंबर 2026 हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम में बार-बार होने वाले जलभराव को लेकर पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। सीएम सैनी ने रविवार को गुरुग्राम में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि शहर की मौजूदा जलभराव की समस्या के पीछे पिछली सरकार के दौरान हुआ विकास और ड्रेनेज व्यवस्था से जुड़ी कमियां भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार शहर में जल निकासी और अन्य विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रही है।

जलभराव को लेकर कांग्रेस पर सीएम सैनी का आरोप

सीएम नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय मंत्री और गुरुग्राम के सांसद राव इंद्रजीत सिंह की ओर से पहले लगाए गए आरोपों का समर्थन किया। राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में पुराने प्राकृतिक नालों और जल निकासी मार्गों पर हुए निर्माण को शहर में लगातार होने वाले जलभराव का एक कारण बताया था।

सैनी ने कहा कि शहर में ड्रेनेज से जुड़े विकास कार्यों को अब तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का प्रयास है कि गुरुग्राम में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

गुरुग्राम में हर मानसून सामने आती है समस्या

गुरुग्राम में मानसून के दौरान जलभराव लंबे समय से एक चुनौती बना हुआ है। अगस्त में हुई भारी बारिश के दौरान शहर के कई प्रमुख इलाकों में पानी भर गया था और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई थी। कई स्कूल बसें भी जलभराव वाली सड़कों पर फंस गई थीं।

रिपोर्टों के मुताबिक, भारी बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख चौराहों और सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ। इसके बाद प्रशासन ने जलभराव से प्रभावित इलाकों में व्यवस्था सुधारने और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कई कदमों पर काम शुरू किया।

कांग्रेस ने भी सरकार पर उठाए सवाल

सीएम सैनी के बयान के बीच कांग्रेस नेताओं ने भी गुरुग्राम की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को गुरुग्राम की जलभराव, कचरे, गड्ढों, ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी समस्याओं के लिए मौजूदा भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

हुड्डा ने सवाल उठाया कि जब केंद्र, हरियाणा सरकार और गुरुग्राम के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि भाजपा से हैं, तो शहर की मौजूदा समस्याओं के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार क्यों बताया जा रहा है।

पहले राव इंद्रजीत सिंह ने भी उठाया था मुद्दा

गुरुग्राम के जलभराव को लेकर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह पहले भी अपनी ही सरकार के सामने समस्या उठा चुके हैं। अगस्त में उन्होंने कहा था कि शहर के पुराने प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर निर्माण होने से पानी के बहाव के रास्ते प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने स्थायी समाधान के लिए पुराने ड्रेनेज मार्गों के आसपास भूमिगत चैनल बनाने और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने का सुझाव दिया था। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर गुरुग्राम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की थी।

स्थायी समाधान के लिए तकनीकी योजनाओं पर काम

गुरुग्राम की जलभराव समस्या के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से तकनीकी विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम गुरुग्राम ने IIT गांधीनगर के विशेषज्ञों के साथ मिलकर शहर के प्रमुख जलभराव वाले स्थानों पर काम शुरू किया है।

इन योजनाओं में अधिक क्षमता वाले रेनवॉटर इंजेक्शन वेल और भूमिगत जल भंडारण टैंकों जैसे विकल्प शामिल हैं। शुरुआती चरण में सुभाष चौक, राजीव चौक, मेडांटा अंडरपास और शीतला माता रोड जैसे जलभराव वाले स्थानों पर ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार ने ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के प्रयास गिनाए

सीएम सैनी ने इससे पहले गुरुग्राम में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए किए जा रहे कई कार्यों की जानकारी दी थी। इनमें ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करना, पुराने ड्रेनों की सफाई, नए ड्रेनेज चैनल बनाना और बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने के लिए रिचार्ज वेल स्थापित करना शामिल है।

सरकार के अनुसार, शहर के कई जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां जल निकासी की क्षमता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। साथ ही भविष्य में भारी बारिश के दौरान जलभराव कम करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है।

जलभराव पर जारी है राजनीतिक बहस

गुरुग्राम की जलभराव समस्या अब राजनीतिक बहस का भी विषय बन गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा नेताओं की ओर से जहां पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुए विकास और प्राकृतिक ड्रेनेज मार्गों में बदलाव को समस्या का एक कारण बताया जा रहा है, वहीं कांग्रेस मौजूदा सरकार के लंबे कार्यकाल और शहर में जारी जलभराव को लेकर सवाल उठा रही है।

गुरुग्राम में बार-बार होने वाले जलभराव के बीच अब मुख्य चुनौती शहर की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने और भारी बारिश के दौरान यातायात तथा आम लोगों की आवाजाही को प्रभावित होने से रोकने की है।

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