8 जुलाई 2026 प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित सबवेंशन स्कीम धोखाधड़ी मामले में दिल्ली-एनसीआर के कई बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जांच के तहत की गई। अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से संबंधित सामग्री की जांच की गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामला उन सबवेंशन स्कीमों से जुड़ा है जिनमें होमबायर्स को यह भरोसा दिया जाता था कि परियोजना के निर्माण के दौरान बैंक की ईएमआई बिल्डर द्वारा चुकाई जाएगी। आरोप है कि कई परियोजनाओं में इस व्यवस्था का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे बड़ी संख्या में खरीदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
ईडी की कार्रवाई दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और अन्य एनसीआर क्षेत्रों में स्थित कई परिसरों पर की गई। जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं, फंड के इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई विभिन्न एजेंसियों द्वारा दर्ज मामलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विश्लेषण किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
सबवेंशन स्कीम के तहत कई होमबायर्स ने घर खरीदने के लिए बैंक से ऋण लिया था। आरोप है कि परियोजनाओं में देरी होने और बिल्डरों द्वारा तय शर्तों का पालन नहीं किए जाने के कारण खरीदारों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ी। कई मामलों में लोगों को न तो समय पर मकान मिला और न ही ईएमआई भुगतान से राहत मिल सकी।
ईडी ने फिलहाल मामले की जांच जारी होने का हवाला देते हुए अधिक जानकारी साझा नहीं की है। एजेंसी का कहना है कि सभी वित्तीय लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से पारदर्शिता बढ़ेगी और खरीदारों का विश्वास मजबूत होगा। वहीं, प्रभावित खरीदारों को उम्मीद है कि जांच के जरिए उनकी शिकायतों का समाधान होगा और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
