21 सितंबर, 2026 : उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा मिलता है तो वहां पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होना चाहिए।
राजभर का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल उत्तर प्रदेश के चार राज्यों में विभाजन को लेकर कोई नया आधिकारिक प्रशासनिक फैसला सामने नहीं आया है। राजभर का बयान राजनीतिक मांग और उनके दावे के रूप में सामने आया है।
चार हिस्सों में बांटने की बात
ओम प्रकाश राजभर ने देवरिया में आयोजित सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की सामाजिक समरसता महारैली में उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी आबादी तथा प्रशासनिक आकार को देखते हुए भविष्य में इसका पुनर्गठन होना चाहिए।
राजभर के अनुसार, उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश जैसे चार अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग लंबे समय से मौजूद है। उन्होंने कहा कि जब भी ऐसा बंटवारा होगा, पूर्वांचल में राजभर समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
पूर्वांचल के CM पद पर क्या बोले राजभर?
राजभर ने पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो वहां राजभर समाज का बेटा पहला मुख्यमंत्री बनेगा।
उन्होंने इसके पीछे पूर्वांचल में राजभर समाज की आबादी और राजनीतिक हिस्सेदारी का तर्क दिया। बाद में NDTV से बातचीत में भी उन्होंने इसी रुख को दोहराते हुए कहा कि वह उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में पुनर्गठन की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं।
2027 के चुनाव से पहले फिर गरमाया मुद्दा
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ राज्य के पुनर्गठन का मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा में है। राजभर की पार्टी का प्रभाव पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में रहा है और ऐसे में पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग उनके राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रही है।
हालांकि, किसी राज्य के गठन या सीमा में बदलाव का अंतिम फैसला केवल किसी मंत्री या राज्य सरकार के बयान से नहीं होता। इसके लिए संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। इसलिए राजभर के मौजूदा बयान को फिलहाल उनके राजनीतिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है, न कि उत्तर प्रदेश के तत्काल विभाजन की आधिकारिक घोषणा के रूप में।
2011 में भी आया था चार राज्यों का प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की चर्चा नई नहीं है। वर्ष 2011 में तत्कालीन मायावती सरकार ने राज्य के पुनर्गठन का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कराया था। उस प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश और अवध प्रदेश में बांटने की बात कही गई थी। प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा गया था।
हालांकि, वह प्रस्ताव आगे राज्य के विभाजन के रूप में लागू नहीं हुआ। मौजूदा समय में भी उत्तर प्रदेश एक ही राज्य है और इसके पुनर्गठन को लेकर कोई नया औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
OBC आरक्षण का मुद्दा भी उठाया
राजभर ने उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग के साथ 27 प्रतिशत OBC आरक्षण में वर्गीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्गों के भीतर अलग-अलग समुदायों को उनकी हिस्सेदारी के अनुसार लाभ मिलना चाहिए।
NDTV से बातचीत में राजभर ने कहा कि वह लंबे समय से OBC आरक्षण में हिस्सेदारी और वर्गीकरण की मांग करते रहे हैं। उन्होंने जातिवार जनगणना को भी इस मुद्दे से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
क्या अभी यूपी के चार राज्य बन रहे हैं?
राजभर के बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में बंटने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लेकिन मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार इसे तत्काल लागू होने वाला प्रशासनिक फैसला नहीं माना जा सकता।
उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हालिया कैबिनेट फैसलों की सूची में भी राज्य के चार हिस्सों में तत्काल विभाजन से संबंधित कोई निर्णय दर्ज नहीं है। इसलिए फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयान और मांग के स्तर पर है।
आगे क्या होगा?
राजभर के बयान ने उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन की पुरानी बहस को फिर सामने ला दिया है। एक ओर पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को अलग राज्य बनाने की मांग पहले से अलग-अलग समय पर उठती रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के पुनर्गठन का मामला संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में कितना प्रभाव डालता है, यह राजनीतिक दलों के रुख और चुनावी बहस पर निर्भर करेगा। फिलहाल राजभर ने चार हिस्सों में बंटवारे और पूर्वांचल के मुख्यमंत्री पद को लेकर अपना दावा स्पष्ट रूप से सामने रखा है।
