31 अगस्त 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP की विरोध मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि सभी पक्षों से उम्मीद है कि वे शांतिपूर्ण और जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करेंगे तथा कानून का पालन करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने कहा कि प्रदर्शनकारियों और कानून लागू कराने वाली एजेंसियों दोनों को निर्धारित कानूनी व्यवस्था के तहत काम करना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है और पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह तय करे कि क्या कानूनी है और क्या अनुमति योग्य है।
10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले को पहले से लंबित संबंधित याचिकाओं के साथ 10 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत उस हाई पावर जांच समिति के समक्ष रखने के लिए भी कहा गया है, जिसका गठन NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस हिंसा की जांच के लिए किया गया है।
5 सितंबर को प्रस्तावित है मार्च
CJP ने दिल्ली में 5 सितंबर को विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को किए गए कथित आश्वासनों को पूरा नहीं किया, जिसके बाद 36 दिनों से चल रहा आंदोलन वापस लिया गया था।
यह मार्च शिक्षक दिवस के दिन प्रस्तावित है।
दिल्ली पुलिस को नहीं मिला अनुमति का आवेदन
दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि उसे इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित मार्च के लिए अनुमति मांगने वाला कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
इसी को लेकर रिटायर्ड दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
याचिका में क्या मांग की गई?
याचिका में मांग की गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जुटान, मार्च या प्रदर्शन तभी होने दिया जाए जब आयोजकों ने आवश्यक अनुमति प्राप्त की हो।
याचिकाकर्ता ने लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शनों को 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन तक नियंत्रित, स्थगित या आवश्यकतानुसार संशोधित करने की मांग भी की है।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों से कानून का पालन करने की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को कानून के दायरे में रहने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी भी कानून का सम्मान करें और पुलिस तथा प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करते हुए कार्रवाई करें।
अदालत ने फिलहाल मार्च पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने CJP की 5 सितंबर की प्रस्तावित विरोध मार्च पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सभी पक्षों से शांतिपूर्ण और जिम्मेदार व्यवहार करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। अदालत ने प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षों को कानून के दायरे में रहने की हिदायत दी है।
