• Tue. Sep 1st, 2026

दिल्ली के लैंडफिल साइटों से 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा साफ, 100 एकड़ जमीन हुई खाली: CM रेखा

31 अगस्त 2026 : दिल्ली सरकार ने राजधानी के तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों—ओखला, भलस्वा और गाजीपुर—से करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस करने का दावा किया है। सरकार के मुताबिक, इस प्रक्रिया के जरिए लगभग 100 एकड़ जमीन को पुनः प्राप्त किया गया है।

ओखला, भलस्वा और गाजीपुर में तेजी से काम

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, ओखला लैंडफिल साइट पर करीब 70 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया गया है, जिससे लगभग 35 एकड़ जमीन खाली हुई।

वहीं, भलस्वा लैंडफिल साइट पर करीब 1.02 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस कर लगभग 45 एकड़ जमीन को पुनः प्राप्त किया गया है। गाजीपुर में करीब 44 लाख मीट्रिक टन कचरे के प्रसंस्करण से 20 एकड़ जमीन खाली हुई है।

वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से कचरा हटाने पर जोर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार लैंडफिल साइटों को साफ करने के लिए वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल कचरे के पहाड़ हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के जीवन स्तर और पर्यावरण को बेहतर बनाने से भी जुड़ा है।

सरकार के अनुसार, लैंडफिल साइटों का आकार कम होने और जमीन के दोबारा इस्तेमाल योग्य बनने से आसपास के इलाकों को अधिक स्वच्छ और रहने योग्य बनाने में मदद मिलेगी।

गाजीपुर में प्रोसेस किए गए मटेरियल का इस्तेमाल

गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कचरे से अलग किए गए इनर्ट मटेरियल का इस्तेमाल निचले इलाकों को भरने और सड़क निर्माण के बेस तैयार करने में किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इससे प्रोसेसिंग के बाद बची सामग्री को बेकार फेंकने के बजाय उपयोगी काम में लगाया जा सकेगा।

नए कचरे के पहाड़ बनने से रोकने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने कचरे के पहाड़ों को हटाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि भविष्य में नए लैंडफिल पहाड़ न बनें।

इसके लिए दिल्ली में चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने की तैयारियां पूरी होने की बात सरकार ने कही है। इन प्लांटों के शुरू होने के बाद रोजाना पैदा होने वाले कचरे के निपटान की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

रोज पैदा होने वाले कचरे के बराबर प्रोसेसिंग का लक्ष्य

दिल्ली सरकार का लक्ष्य शहर में रोजाना पैदा होने वाले कचरे की अधिकतम मात्रा को उसी स्तर पर प्रोसेस करने की क्षमता विकसित करना है। इसके साथ ही अलग-अलग श्रेणियों के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था लैंडफिल साइटों पर कचरे का दबाव कम करने में मदद कर सकती है।

100 एकड़ जमीन का दोबारा इस्तेमाल संभव

तीनों लैंडफिल साइटों से कचरा हटाने के बाद लगभग 100 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त होने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि इससे दिल्ली में उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने और आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरण में सुधार करने के अवसर बढ़ेंगे।

कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार के अनुसार ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइटों से करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया जा चुका है और लगभग 100 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुराने कचरे के पहाड़ हटाने के साथ-साथ भविष्य में नए लैंडफिल बनने से रोकने के लिए आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *