31 अगस्त 2026 : IIT-दिल्ली में MSc फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद कई दिनों से चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। छात्रों और संस्थान प्रशासन के बीच हुई बातचीत के बाद बाहरी जांच समिति गठित करने समेत कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है।
छात्रों ने जमीनी प्रदर्शन रोका
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने 29 अगस्त को हुई बैठक के बाद अपना ऑन-ग्राउंड आंदोलन रोकने का फैसला किया। छात्रों का कहना है कि वे जांच समिति की रिपोर्ट आने तक प्रदर्शन स्थगित रखेंगे और रिपोर्ट को छात्रों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों के साथ साझा किए जाने की उम्मीद है।
बाहरी जांच समिति पर बनी सहमति
छात्रों की प्रमुख मांगों में ऋषिकेश कुमार की मौत की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच शामिल थी। प्रशासन ने बाहरी जांच समिति गठित करने पर सहमति जताई है।
छात्रों के अनुसार, समिति के अध्यक्ष और छात्र सदस्यों के नामांकन में प्रदर्शनकारी छात्रों की भूमिका भी स्वीकार की गई है। समिति को ऋषिकेश की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच का अधिकार दिया जाएगा।
31 वर्षीय MSc छात्र की हुई थी मौत
31 वर्षीय MSc फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त को IIT-दिल्ली के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। घटना के बाद छात्रों ने परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया था और मामले की पारदर्शी जांच की मांग उठाई थी।
दिल्ली पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित FIR भी दर्ज की है। पुलिस जांच में छात्र के मोबाइल फोन और अन्य रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रोटोकॉल सार्वजनिक करने की मांग
छात्रों ने संस्थान से मानसिक स्वास्थ्य सहायता से जुड़े सभी प्रोटोकॉल को समय पर सार्वजनिक करने की मांग भी रखी थी। छात्रों के मुताबिक, प्रशासन ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है।
छात्रों का कहना है कि कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इनमें डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स, एसोसिएट डीन ऑफ हॉस्टल मैनेजमेंट और एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर के पदों से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग शामिल है।
प्रशासन ने इन अधिकारियों को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने की मांग को फिलहाल जांच समिति के निर्णय पर छोड़ दिया है।
मुआवजे को लेकर भी चर्चा
छात्रों ने ऋषिकेश की मां के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी थी। प्रशासन ने 6 लाख रुपये के बेनेवोलेंट फंड, चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति और IIT-दिल्ली Alumni and Employee Network से अतिरिक्त योगदान का प्रस्ताव दिया।
हालांकि, ऋषिकेश की मां ने आर्थिक मुआवजा लेने से इनकार किया और मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे छात्रों के लिए कैंपस में रहने की सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन फिलहाल स्थगित है और आगे की कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। छात्रों की मांग है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो तथा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
कुल मिलाकर, IIT-दिल्ली में MSc फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद शुरू हुआ छात्रों का जमीनी विरोध फिलहाल स्थगित हो गया है। प्रशासन ने बाहरी जांच समिति गठित करने और मानसिक स्वास्थ्य सहायता से जुड़े प्रोटोकॉल सार्वजनिक करने समेत कई मांगों पर सहमति जताई है। अब छात्रों की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है।
