8 जुलाई 2026 : पंजाबी फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर चर्चा में है। इस सप्ताह फिल्म की लेखिका, निर्माता और अभिनेत्री सुखमनी सदाना ने फिल्म की सेंसरशिप से जुड़ी चुनौतियों और उसके निर्माण के दौरान सामने आए अनुभवों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल एक सिनेमाई परियोजना नहीं, बल्कि इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का प्रयास है।
सुखमनी सदाना ने बताया कि ‘सतलुज’ को बनाने की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि फिल्म के विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी कहानी पर गहन शोध किया गया। टीम का उद्देश्य तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर एक जिम्मेदार और संतुलित प्रस्तुति देना था।
उन्होंने कहा कि फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने के दौरान कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा। सेंसरशिप से जुड़े विवाद और बाद में ओटीटी प्लेटफॉर्म से फिल्म हटने के बाद इस मुद्दे ने और अधिक ध्यान आकर्षित किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद उनकी टीम अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटी।
सुखमनी सदाना के अनुसार, ‘सतलुज’ का उद्देश्य किसी विवाद को जन्म देना नहीं था, बल्कि उन घटनाओं और संघर्षों को सामने लाना था, जो पंजाब के इतिहास और मानवाधिकारों की बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिनेमा समाज में संवाद और जागरूकता बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों का समर्थन उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। ओटीटी से फिल्म हटने के बाद पंजाब के कई गांवों और सामाजिक संगठनों ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग आयोजित की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि लोग इस फिल्म और इसके विषय को लेकर गंभीर रुचि रखते हैं।
सदाना ने रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में कला, साहित्य और सिनेमा को विभिन्न विषयों पर विचार रखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, अलग-अलग दृष्टिकोणों को सुनना और समझना समाज को मजबूत बनाता है।
फिल्म के निर्माण में शामिल कलाकारों और पूरी तकनीकी टीम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सभी ने कठिन परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में अधिक से अधिक दर्शकों को ‘सतलुज’ देखने का अवसर मिलेगा और वे इसके संदेश को समझ पाएंगे।
इस बीच, ‘सतलुज’ और उससे जुड़े सेंसरशिप विवाद को लेकर चर्चा अभी भी जारी है। फिल्म के समर्थन और विरोध में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सुखमनी सदाना का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक महत्वपूर्ण कहानी को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना था।
