8 जुलाई 2026 : हरियाणा के हांसी शहर तक भाखड़ा नहर का पेयजल पहुंचाने के लिए बनाई जा रही पाइपलाइन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। इस परियोजना ने पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे के पुराने मुद्दे के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी नए विवाद को जन्म दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भाखड़ा का पानी किसे मिलेगा और हांसी पाइपलाइन को लेकर विवाद क्यों हो रहा है।
हांसी शहर के लिए अमृत (AMRUT) योजना के तहत भाखड़ा नहर से पेयजल पहुंचाने के लिए करीब 30 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। सरकार का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य शहर के लोगों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है।
विवाद तब शुरू हुआ जब पाइपलाइन के रास्ते में पड़ने वाले चनोट (Chanot) गांव के लोगों ने मांग की कि उन्हें भी इसी पाइपलाइन से पानी का कनेक्शन दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब पाइपलाइन उनके गांव से होकर गुजर रही है तो उन्हें भी इसका लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए गांव में लगातार प्रदर्शन और धरना जारी है।
दूसरी ओर हरियाणा सरकार का कहना है कि यह परियोजना विशेष रूप से शहरी क्षेत्र यानी हांसी शहर के लिए तैयार की गई है। इसलिए इस पाइपलाइन से बीच में किसी गांव को टी-जॉइंट (T-Connection) देना तकनीकी और कानूनी रूप से संभव नहीं है। सरकार ने ग्रामीणों को अलग पेयजल पाइपलाइन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी दिया है।
यह विवाद केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। इससे पहले भी पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा बांध के पानी के बंटवारे को लेकर कई बार मतभेद सामने आ चुके हैं। पंजाब का कहना है कि राज्य के पास अतिरिक्त पानी उपलब्ध नहीं है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि उसे पेयजल की जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी मिलना चाहिए। यही कारण है कि भाखड़ा के पानी का मुद्दा समय-समय पर राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बनता रहा है।
हाल के दिनों में चनोट गांव के प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है। सरकार का कहना है कि गांव के लिए अलग पाइपलाइन और आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सकता है, जबकि ग्रामीण अपनी मूल मांग पर कायम हैं कि उन्हें गुजर रही मुख्य पाइपलाइन से ही कनेक्शन दिया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल पेयजल आपूर्ति का नहीं बल्कि जल संसाधनों के प्रबंधन, कानूनी प्रावधानों और विभिन्न योजनाओं के दायरे से भी जुड़ा हुआ है। यदि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं तो परियोजना बिना किसी और देरी के पूरी हो सकती है और हांसी शहर को निर्धारित समय पर पेयजल मिल सकेगा।
फिलहाल हांसी पाइपलाइन परियोजना और भाखड़ा के पानी को लेकर विवाद पर सभी की नजर बनी हुई है। सरकार और ग्रामीणों के बीच आगे होने वाली वार्ताएं इस मामले की दिशा तय करेंगी।
