07 सितंबर 2026: पंजाब में केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक बार फिर टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने केंद्र सरकार पर राज्य के संवैधानिक अधिकारों और निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। कैबिनेट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर भी आपत्ति जताई है।
पंजाब सरकार का कहना है कि केंद्र ने राज्य सरकार के विचार प्राप्त किए बिना नियुक्ति को आगे बढ़ाया। इसी मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर पंजाब के अधिकारों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र की कार्रवाई संघीय ढांचे के लिए चिंता का विषय है।
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति पर आपत्ति
पंजाब कैबिनेट ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई। राज्य सरकार के मुताबिक, 5 सितंबर 2026 की अधिसूचना के जरिए नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जबकि पंजाब सरकार के विचारों का इंतजार किया जाना चाहिए था।
कैबिनेट ने मांग की कि जब तक पंजाब सरकार की राय प्राप्त कर उस पर उचित विचार नहीं किया जाता, तब तक नियुक्ति और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को रोका जाए।
मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर का दिया हवाला
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण से जुड़े Memorandum of Procedure (MoP) के पैरा 6 का हवाला दिया।
सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत संबंधित राज्य सरकार के विचार प्राप्त किए जाने चाहिए। पंजाब कैबिनेट का आरोप है कि इस मामले में राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई।
पंजाब सरकार ने इसे निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी बताया है।
CM मान ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर पंजाब के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, केंद्र की ओर से लगातार ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं जिनसे राज्य के संवैधानिक अधिकार और संघीय ढांचा प्रभावित हो सकता है।
मान ने पंजाब यूनिवर्सिटी के केंद्रीयकरण के प्रस्ताव का भी जिक्र किया। पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, लेकिन इसके बावजूद केंद्र की ओर से हस्तक्षेप जारी रहा।
BBMB के नियमों में बदलाव का भी मुद्दा
पंजाब सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड यानी BBMB के नियमों में किए गए बदलाव को भी अपने आरोपों का हिस्सा बनाया है।
कैबिनेट के अनुसार, पहले सदस्य (पावर) के पद पर पंजाब से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की परंपरा रही थी। राज्य सरकार का दावा है कि नियमों में बदलाव से पंजाब की अपने नदी जल और बांधों से संबंधित संस्थागत प्रतिनिधित्व की स्थिति कमजोर हुई है।
पंजाब सरकार ने इसे भी राज्य के हितों और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।
RDF के 9,000 करोड़ रुपये से अधिक बकाये का दावा
पंजाब कैबिनेट ने ग्रामीण विकास फंड यानी RDF के बकाये का मुद्दा भी उठाया। राज्य सरकार के मुताबिक, केंद्र के पास पंजाब के 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के RDF बकाया हैं।
कैबिनेट का कहना है कि इन फंडों का इस्तेमाल ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाना है और इसका लाभ किसानों तथा ग्रामीण क्षेत्रों को मिलना है। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि बकाया राशि रोके जाने से पंजाब को वित्तीय नुकसान हो रहा है।
2025 की बाढ़ के राहत पैकेज का भी जिक्र
पंजाब सरकार ने 2025 में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद घोषित राहत पैकेज का भी मुद्दा उठाया। कैबिनेट के अनुसार, केंद्र की ओर से प्रधानमंत्री के माध्यम से पंजाब के लिए ₹1,600 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की गई थी।
राज्य सरकार का दावा है कि इस पैकेज की राशि अभी तक पंजाब को जारी नहीं की गई है। पंजाब कैबिनेट ने इसे लेकर भी केंद्र से जवाबदेही की मांग की है।
संघीय ढांचे को लेकर पंजाब सरकार की चिंता
पंजाब कैबिनेट ने कहा कि राज्य और केंद्र के बीच संबंध संविधान में निर्धारित शक्तियों और प्रक्रियाओं पर आधारित होने चाहिए। सरकार का आरोप है कि हाल के कुछ फैसलों से राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसी संदर्भ में केंद्र की नीतियों को पंजाब के हितों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
पंजाब-केंद्र टकराव फिर चर्चा में
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति, BBMB के नियमों, पंजाब यूनिवर्सिटी के केंद्रीयकरण और RDF बकाये जैसे मुद्दों को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं।
पंजाब सरकार इन मामलों को राज्य के अधिकारों और संघीय ढांचे से जोड़कर देख रही है। वहीं, जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का मुद्दा फिलहाल इस राजनीतिक विवाद का प्रमुख केंद्र बन गया है।
