8 सितंबर 2026: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के रोहतक जिले में MGNREGA फंड के कथित डायवर्जन के मामले में कार्रवाई न होने पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने रोहतक के उपायुक्त (DC) को व्यक्तिगत रूप से शपथ लेकर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह कदम तब उठाया जब उसके सामने आया कि 2023 में लोकपाल (Ombudsman) की रिपोर्ट में MGNREGA योजना के फंड के डायवर्ट होने की बात सामने आई थी और प्रारंभिक रिपोर्ट ने भी इन तथ्यों की पुष्टि की थी, लेकिन अब तक न तो FIR दर्ज हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई।
2023 की रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने आया। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति राजेश गौड़ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि MGNREGA फंड के डायवर्जन को लेकर Ombudsman की रिपोर्ट वर्ष 2023 में ही सामने आ चुकी थी। इसके अलावा एक प्रारंभिक रिपोर्ट में भी संबंधित तथ्यों की पुष्टि की गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
FIR दर्ज नहीं होने पर कोर्ट ने मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने पाया कि इतने लंबे समय के बाद भी मामले में FIR दर्ज नहीं की गई है। अदालत ने यह भी नोट किया कि संबंधित मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इसके बाद कोर्ट ने रोहतक जिला प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि रोहतक के उपायुक्त स्वयं मामले की जांच करें और अपनी व्यक्तिगत शपथ पर हलफनामा दाखिल कर यह बताएं कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और वर्तमान स्थिति क्या है।
दो सप्ताह में दाखिल करना होगा हलफनामा
हाईकोर्ट ने रोहतक DC को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।
अब जिला प्रशासन को कोर्ट के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि 2023 की Ombudsman रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच के बाद भी FIR दर्ज करने या अन्य कार्रवाई में देरी क्यों हुई।
जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
यह मामला राम चंदर और एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जीएस गोपेरा पेश हुए। हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक बाल्यान ने पक्ष रखा। मामले में कोर्ट की सहायता वरिष्ठ अधिवक्ता एवं वरिष्ठ पैनल काउंसल डीरेज जैन और अधिवक्ता गुरनीत सग्गू ने भी की।
MGNREGA फंड के इस्तेमाल पर उठे सवाल
MGNREGA ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली केंद्र की महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में योजना के फंड के कथित डायवर्जन से जुड़े मामले में लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है।
अदालत की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि जब संबंधित प्राधिकरण की रिपोर्ट में फंड डायवर्जन की बात दर्ज की गई थी और प्रारंभिक रिपोर्ट ने भी तथ्यों की पुष्टि की थी, तो उसके बाद कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए गए।
अब DC के हलफनामे पर नजर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब रोहतक DC को व्यक्तिगत हलफनामे के माध्यम से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसमें अब तक हुई जांच, कार्रवाई और FIR की स्थिति से संबंधित जानकारी अदालत के सामने रखी जाएगी।
अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। उस समय अदालत प्रशासन की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे और उसमें दी गई जानकारी पर आगे विचार कर सकती है।
