21 सितंबर, 2026 : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्पेशल मॉनिटर बालकिशन गोयल ने लुधियाना की सेंट्रल जेल, बोरस्टल जेल और महिला जेल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जेलों में कैदियों को मिल रही सुविधाओं, भोजन व्यवस्था और उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की। उन्होंने जेल प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक सुधारों पर चर्चा की।
तीनों जेलों में कैदियों के कल्याण की समीक्षा
बालकिशन गोयल ने रविवार को लुधियाना की तीन प्रमुख जेलों का निरीक्षण किया। उन्होंने जेल अधीक्षकों के साथ कैदियों के कल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की।
दौरे के दौरान भोजन की गुणवत्ता और जेलों में उपलब्ध सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जेलों में जिन छोटे सुधारों की आवश्यकता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और कैदियों को बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जाए।
बोरस्टल जेल के युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट पर जोर
NHRC स्पेशल मॉनिटर ने विशेष रूप से बोरस्टल जेल में रह रहे युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट कोर्स अनिवार्य करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि युवाओं को ऐसे कौशल सिखाए जाने चाहिए, जिनका इस्तेमाल वे जेल से बाहर निकलने के बाद रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए कर सकें।
जेल में कौशल प्रशिक्षण को केवल समय बिताने की गतिविधि के बजाय भविष्य में आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य कैदियों को समाज में वापस लौटने के बाद अपने पैरों पर खड़े होने में मदद करना है।
महिला कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने की सलाह
महिला जेल को लेकर भी NHRC अधिकारी ने व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने महिला कैदियों को अचार बनाने, मेहंदी लगाने और अन्य कौशल का प्रशिक्षण देने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण से महिलाएं जेल से बाहर आने के बाद अपनी आजीविका कमाने में सक्षम हो सकती हैं। कौशल विकास के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
कैदियों की शिकायतों के लिए रजिस्टर बनाने का सुझाव
दौरे के दौरान कैदियों की समस्याओं और शिकायतों को दर्ज करने के लिए जेलों में शिकायत रजिस्टर शुरू करने का सुझाव भी दिया गया। इसमें कैदी अपनी समस्याएं दर्ज कर सकें और जेल प्रशासन उन पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई कर सके।
इस तरह की व्यवस्था से जेल प्रशासन और कैदियों के बीच संवाद को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, कैदियों ने परिवार से मुलाकात और जमानत में देरी जैसे मुद्दे भी उठाए, जिन पर प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया।
जिला प्रशासन के अधिकारी भी रहे मौजूद
दौरे के दौरान जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी वरिंदर सिंह टिवाना और जिला बाल संरक्षण अधिकारी रश्मि समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी इस दौरान उपस्थित थे।
जेल सुधार और मानवाधिकार पर ध्यान
NHRC का जेलों का निरीक्षण कैदियों के अधिकारों और जेलों में रहने की परिस्थितियों की समीक्षा के व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है। आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, NHRC को जेलों या अन्य हिरासत संस्थानों का दौरा कर वहां रहने की परिस्थितियों का अध्ययन करने और सुधार के लिए सिफारिशें देने का अधिकार है।
लुधियाना के दौरे में भी भोजन, शिकायतों के समाधान और कौशल विकास जैसे विषयों पर जोर दिया गया। इससे जेलों में केवल सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि कैदियों के कल्याण और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता सामने आती है।
बच्चों और बुजुर्गों की सुविधाओं का भी लिया जायजा
जेलों के दौरे के बाद बालकिशन गोयल ने दोराहा स्थित चिल्ड्रन होम का भी दौरा किया और वहां बच्चों से बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने Heavenly Palace स्थित ओल्ड एज होम का दौरा कर बुजुर्गों की स्थिति के बारे में जानकारी ली और भोजन व्यवस्था की समीक्षा की।
आगे सुधार पर रहेगा जोर
लुधियाना की जेलों के दौरे के दौरान दिए गए सुझावों में भोजन की गुणवत्ता सुधारना, युवाओं के लिए कौशल विकास को बढ़ावा देना, महिला कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देना और कैदियों की शिकायतों को दर्ज करने के लिए व्यवस्था मजबूत करना प्रमुख रहे।
इन कदमों का उद्देश्य जेलों में रहने वाले लोगों की बुनियादी सुविधाओं और कल्याण से जुड़े पहलुओं को बेहतर करना है। NHRC की भूमिका ऐसे मामलों में मानवाधिकार मानकों के पालन और आवश्यक सुधारों की दिशा में निगरानी तथा सिफारिशें देने की है।
