21 सितंबर, 2026 : चंडीगढ़ ट्राइसिटी का रियल एस्टेट बाजार इन दिनों एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है। यहां एक तरफ घरों और प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कुल प्रॉपर्टी लेनदेन की संख्या में कमी आई है। CII-Knight Frank की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2026 के बीच चंडीगढ़ ट्राइसिटी में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में करीब 63 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि मुंबई, दिल्ली-NCR और बेंगलुरु जैसे प्रमुख बाजारों की संयुक्त 42 प्रतिशत वृद्धि से भी अधिक बताई गई है।
कम खरीदार, लेकिन बड़ी कीमतों में सौदे
चंडीगढ़ के प्रॉपर्टी बाजार में सबसे दिलचस्प बदलाव यह है कि दस्तावेजों के पंजीकरण की संख्या कम हुई है, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य लगभग उसी स्तर पर बना हुआ है। एस्टेट ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में करीब 12,040 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे, जो 2025-26 में घटकर 7,311 रह गए। यानी दो वर्षों में पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या में करीब 39 प्रतिशत की गिरावट आई।
इसके बावजूद कुल लेनदेन मूल्य करीब ₹6,881 करोड़ रहा। वहीं, स्टांप ड्यूटी से सरकार की आय 2023-24 के ₹247.02 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹348.23 करोड़ हो गई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में कम संख्या में सौदे हो रहे हैं, लेकिन उनमें औसत प्रॉपर्टी वैल्यू काफी अधिक है।
करोड़ों रुपये में बिक रहे चंडीगढ़ के मकान
चंडीगढ़ के प्रीमियम सेक्टरों में महंगी प्रॉपर्टी की डील इस बदलाव को और स्पष्ट करती है। सेक्टर 9-A में एक मकान अगस्त 2025 में ₹126 करोड़ में रजिस्टर्ड हुआ, जो शहर की अब तक की सबसे महंगी आवासीय डील बताई गई है। इसी इलाके में एक अन्य बंगला चार महीने बाद ₹108.5 करोड़ में बिका।
दूसरी तरफ, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) की सेक्टर 63 स्थित एक 2BHK संपत्ति की नीलामी में कीमत ₹1.92 करोड़ तक पहुंची। हालांकि इसी नीलामी में शहर की 14 CHB संपत्तियों में से 12 को कोई बोली नहीं मिली। यह बताता है कि बाजार में महंगी प्रॉपर्टी और सामान्य खरीदारों के बीच अंतर बढ़ रहा है।
चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी महंगी होने की बड़ी वजह
चंडीगढ़ में जमीन की उपलब्धता सीमित है। शहर का विस्तार दूसरे बड़े शहरों की तरह आसानी से बाहर की ओर नहीं हो सकता। इसकी निर्धारित सीमाएं, नियोजित विकास और पुराने सेक्टरों में सीमित प्रॉपर्टी बाजार में उपलब्ध जमीन को दुर्लभ बनाती हैं।
सेक्टर 2, 5, 8 और 9 जैसे पुराने और प्रीमियम इलाकों में संपत्तियां लंबे समय बाद बाजार में आती हैं। सीमित सप्लाई के कारण इन इलाकों की कीमतों पर लगातार दबाव बना रहता है।
बड़े निवेशक भी बढ़ा रहे हैं मांग
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उत्तर भारत के हाई-नेट-वर्थ निवेशकों के लिए चंडीगढ़ के प्रीमियम पते एक तरह की लंबी अवधि की संपत्ति बन गए हैं। ऐसे खरीदारों की मांग सामान्य होम लोन लेने वाले खरीदारों से अलग होती है।
चंडीगढ़ की नियोजित व्यवस्था, हरित क्षेत्र, बुनियादी सुविधाएं और जमीन के रिकॉर्ड की व्यवस्था भी शहर को प्रीमियम रियल एस्टेट बाजार बनाए रखने में भूमिका निभाती है।
कलेक्टर रेट का भी असर
प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कलेक्टर रेट पर भी पड़ता है। बाजार में लेनदेन मूल्यों के बढ़ने के साथ कलेक्टर रेट में बदलाव होते हैं, जिसका प्रभाव दूसरे इलाकों की संपत्तियों पर भी पड़ सकता है।
इस वजह से प्रीमियम सेक्टरों में होने वाले बड़े सौदों का असर शहर के अन्य हिस्सों में प्रॉपर्टी की लागत पर भी पड़ने की चर्चा है।
आम परिवारों के लिए बढ़ी मुश्किल
प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो चंडीगढ़ में नौकरी करते हैं लेकिन अभी अपना घर नहीं खरीद पाए हैं। शिक्षकों, डॉक्टरों, सरकारी कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों और अन्य मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए महंगी होती प्रॉपर्टी खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्टर 63 में ₹1.92 करोड़ की 2BHK संपत्ति के लिए मौजूदा ब्याज दरों पर अनुमानित EMI करीब ₹1.68 लाख प्रति माह बैठती है। यह राशि मध्यम आय वर्ग के कई परिवारों की मासिक आय से काफी अधिक हो सकती है।
किराए पर भी बढ़ रहा दबाव
प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर किराये के बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में एक सामान्य 2BHK का किराया करीब ₹30,000 से ₹35,000 प्रति माह तक पहुंच गया है। दो साल पहले यही किराया लगभग ₹20,000 के आसपास बताया गया था।
इससे उन परिवारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है जो महंगी प्रॉपर्टी खरीदने की स्थिति में नहीं हैं और किराए के मकान में रह रहे हैं।
अफोर्डेबल हाउसिंग पर ध्यान देने की जरूरत
बढ़ती कीमतों और सामान्य खरीदारों की कम होती भागीदारी के बीच अफोर्डेबल हाउसिंग का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बाहरी सेक्टरों के कलेक्टर रेट को प्रीमियम सेक्टरों के रेट से अलग रखने के लिए अलग-अलग जोन के आधार पर व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
वहीं, CHB की संपत्तियों के रिजर्व प्राइस को भी वास्तविक खरीदारों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए तय करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
मोहाली-पंचकूला से जुड़ा ट्राइसिटी समाधान
चंडीगढ़ की सीमित जमीन को देखते हुए शहर के बाहर अफोर्डेबल हाउसिंग उपलब्ध कराना भी एक विकल्प माना जा रहा है। मोहाली और पंचकूला में रोजगार केंद्रों से बेहतर सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी और आवासीय विकास को ट्राइसिटी स्तर पर जोड़ने की जरूरत बताई गई है।
