9 सितंबर 2026: पंजाब के नवांशहर में किसानों को फसल अवशेष यानी पराली के उचित प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए जागरूक किया गया। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), नवांशहर में जिला स्तरीय पराली प्रबंधन कैंप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना और खेतों में फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन के तरीके बताना था।
पराली जलाने से होने वाले नुकसान बताए
कैंप के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले पर्यावरणीय और कृषि संबंधी नुकसान के बारे में जानकारी दी। किसानों से अपील की गई कि धान की पराली को खेत में जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक तरीकों की मदद से उसका उचित प्रबंधन किया जाए।
PAU के एसोसिएट डायरेक्टर ट्रेनिंग डॉ. प्रदीप कुमार ने पराली जलाने के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से सुझाई जा रही नई तकनीकों को अपनाने की अपील की।
Happy Seeder और Super Seeder की जानकारी
कैंप में किसानों को धान की पराली को खेत में मिलाकर गेहूं की बुवाई करने की तकनीक के बारे में विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित मशीनों के इस्तेमाल से पराली को खेत में ही प्रबंधित किया जा सकता है।
PAU के सहायक प्रोफेसर डॉ. जसविंदर कुमार ने किसानों को Happy Seeder, Super Seeder, Smart Seeder और Surface Seeder जैसी मशीनों के इस्तेमाल की जानकारी दी। उन्होंने इन मशीनों की विशेषताओं के साथ-साथ इनके इस्तेमाल के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया।
इन तकनीकों का उद्देश्य फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उन्हें खेत में ही प्रबंधित करना है। इससे किसान पराली की समस्या से निपटने के साथ-साथ अगली फसल की बुवाई भी वैज्ञानिक तरीके से कर सकते हैं।
सरकारी योजनाओं की भी दी जानकारी
कैंप में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. लेख राज कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।
डॉ. राजेश कुमार, सहायक निदेशक बागवानी, डॉ. कंवलदीप सिंह सांघा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एटीएमए और कृषि विकास अधिकारी कुलविंदर कौर ने भी किसानों को कृषि एवं बागवानी से जुड़ी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
पराली प्रबंधन से मिट्टी और पर्यावरण को फायदा
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन का फायदा केवल प्रदूषण कम करने तक सीमित नहीं है। पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी के स्वास्थ्य और कृषि प्रणाली पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कैंप में किसानों को मिट्टी के खराब होने और कृषि गतिविधियों से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
जैविक विकल्प अपनाने की सलाह
कैंप के दौरान किसानों को रासायनिक इनपुट के विकल्प के तौर पर जैविक फॉर्मूलेशन के इस्तेमाल के बारे में भी बताया गया। PAU के सहायक प्रोफेसर डॉ. बलजीत सिंह ने जीवामृत और बीजामृत जैसे जैविक विकल्पों की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने और सुरक्षित एवं पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।
पशुपालन और मिट्टी की गुणवत्ता पर भी चर्चा
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने मिट्टी के क्षरण और उर्वरकों के बहाव से जुड़े प्रभावों पर भी चर्चा की। PAU के पशु विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. तेजबीर सिंह ने बताया कि मिट्टी का क्षरण और कृषि रसायनों का बहाव पशुओं के चारे को प्रभावित कर सकता है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।
इस दौरान किसानों को खेती के साथ-साथ पशुपालन और अन्य सहायक कृषि गतिविधियों के बारे में भी जागरूक किया गया।
किसानों के लिए स्वरोजगार के अवसर
कैंप में खेती के अलावा किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी गई। PAU KVK की ओर से किसानों और ग्रामीण समुदाय के लिए चलाए जा रहे विभिन्न प्रशिक्षण और गतिविधियों के बारे में बताया गया।
होम साइंस विशेषज्ञ डॉ. राजिंदर कौर ने किसानों को घरेलू पोषण वाटिका और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी। इसका उद्देश्य किसानों को कृषि के साथ अतिरिक्त आय के अवसरों के बारे में जागरूक करना है।
किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील
नवांशहर में आयोजित इस कैंप के जरिए किसानों को यह संदेश दिया गया कि पराली जलाने के बजाय आधुनिक मशीनरी और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए। विशेषज्ञों ने किसानों को PAU की ओर से सुझाई गई तकनीकों को अपनाने और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित किया।
