13 अगस्त, 2026 बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक स्वार्थ की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद में आम जनता और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।
मायावती ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार, दोनों पक्ष अपनी-अपनी राजनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं और जनता से जुड़े मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं।
उन्होंने संसद की कार्यवाही के दौरान उठने वाले मुद्दों को लेकर भी चिंता जताई। मायावती का कहना था कि संसद देश की समस्याओं पर गंभीर चर्चा और समाधान का प्रमुख मंच है, इसलिए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता से जुड़े विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इन विषयों पर सरकार और विपक्ष दोनों को गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए। उनका मानना है कि संसद में आम नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक खींचतान पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों पक्ष अपने-अपने हितों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया।
उन्होंने कहा कि संसद में जनता के प्रतिनिधियों को ऐसे मुद्दे उठाने चाहिए जिनका सीधा संबंध आम लोगों के जीवन से है। बेरोजगार युवाओं, किसानों, गरीब परिवारों और कमजोर वर्गों की समस्याओं पर प्रभावी चर्चा की आवश्यकता है।
मायावती ने विपक्षी दलों की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल सरकार का विरोध करना पर्याप्त नहीं है। विपक्ष को जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाने के साथ-साथ उनके समाधान के लिए ठोस सुझाव भी देने चाहिए।
वहीं, उन्होंने सरकार से भी अपेक्षा की कि वह विपक्ष की आवाज को गंभीरता से सुने और संसद में उठाए जाने वाले जनहित के मुद्दों पर उचित जवाब दे। उनके अनुसार, लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
बसपा प्रमुख ने सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों, गरीबों और अन्य वंचित वर्गों के हितों से जुड़े मामलों पर संसद में पर्याप्त चर्चा होनी चाहिए।
मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक बहस और टकराव देखने को मिलता है। संसद की कार्यवाही कई बार विरोध और हंगामे के कारण प्रभावित होती रही है।
उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अपने व्यक्तिगत और पार्टी हितों से ऊपर उठकर देशहित और जनहित को प्राथमिकता दें। उनका कहना था कि संसद का समय जनता की समस्याओं पर चर्चा करने और उनके समाधान के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मायावती ने यह भी कहा कि देश की जनता अपने प्रतिनिधियों से जवाबदेही की उम्मीद करती है। जनता चाहती है कि संसद में उसके रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो।
बसपा प्रमुख के बयान के बाद संसद की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष की भूमिका को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है। मायावती लंबे समय से केंद्र और विभिन्न राजनीतिक दलों की नीतियों पर अपनी स्वतंत्र राय रखती रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जनहित से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाती रहेगी। बसपा का रुख सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से अलग मुद्दों पर अपनी राजनीतिक स्थिति रखने का रहा है।
कुल मिलाकर, मायावती ने संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपने राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर जनता के मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को संसद की प्राथमिकता बनाने की मांग की।
