18 अप्रैल 2026 : भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर फेंस (बाड़) को लेकर हाल के दिनों में चर्चा तेज हुई है। कई इलाकों में फेंस की स्थिति में बदलाव या ‘शिफ्ट’ की बात सामने आई है, जिससे लोगों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है।
दरअसल, भारत-पाक सीमा पूरी तरह सीधी रेखा नहीं है। कई जगहों पर नदी, नाले और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सीमा (International Border) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LoC) के बीच अंतर दिखाई देता है। ऐसे में सुरक्षा कारणों से फेंस को वास्तविक सीमा से कुछ दूरी पर लगाया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार फेंस का शिफ्ट होना अक्सर तकनीकी और सुरक्षा जरूरतों के चलते किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी इलाके में नदी का रास्ता बदल जाता है या बाढ़ आती है, तो फेंस को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना पड़ता है।
इसके अलावा, सीमा पार घुसपैठ और तस्करी को रोकने के लिए भी समय-समय पर फेंस की स्थिति में बदलाव किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियां इलाके की स्थिति के अनुसार निर्णय लेती हैं, ताकि निगरानी और नियंत्रण बेहतर हो सके।
कुछ मामलों में स्थानीय लोगों को भी इस बदलाव का असर झेलना पड़ता है, क्योंकि उनकी जमीन फेंस के दूसरी तरफ चली जाती है। इससे खेती और आवाजाही में दिक्कतें आती हैं, जिसे लेकर कई बार विरोध भी होता है।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि फेंस शिफ्ट करने का मकसद केवल सुरक्षा को मजबूत करना होता है और इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा में कोई बदलाव नहीं किया जाता।
कुल मिलाकर भारत-पाक सीमा पर फेंस का शिफ्ट होना एक तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य सीमा की बेहतर निगरानी और देश की सुरक्षा को मजबूत करना है।
