20 अप्रैल 2026 : पंजाब में प्रस्तावित एंटी-सेक्रिलेज कानून को लेकर तैयार किए जा रहे मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs) में अब क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले लेनदेन को भी जांच के दायरे में लाने की बात सामने आई है। इस कदम का उद्देश्य ऐसे मामलों में डिजिटल फंडिंग और संभावित साजिशों का पता लगाना है।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां अब उन वित्तीय लेनदेन पर भी नजर रखेंगी, जो पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर होते हैं। इसमें क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं, जिन्हें ट्रैक करना अपेक्षाकृत मुश्किल माना जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि SOPs के तहत जांच के दायरे को विस्तारित किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की साजिश या फंडिंग को समय रहते पकड़ा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल करेंसी के बढ़ते उपयोग को देखते हुए जांच एजेंसियों का यह कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अपराधों के वित्तीय पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर गोपनीयता और तकनीकी चुनौतियों पर भी चर्चा हो रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो लेनदेन की जांच के लिए उन्नत तकनीकी संसाधनों और विशेषज्ञता की जरूरत होगी।
सरकार का मानना है कि इस तरह के कदम से कानून को और प्रभावी बनाया जा सकेगा और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई मजबूत होगी।
कुल मिलाकर एंटी-सेक्रिलेज कानून के तहत SOPs में क्रिप्टो लेनदेन को शामिल करना जांच प्रक्रिया को आधुनिक और व्यापक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
