25 अप्रैल 2026 : अमृतसर, जिसे सरोवरों का शहर कहा जाता है, में जल विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस योजना के तहत पुराने और भूले-बिसरे ‘खूओं’ यानी पारंपरिक कुओं को फिर से बहाल किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार यह पहल शहर की ऐतिहासिक जल संरचनाओं को संरक्षित करने और पानी के पारंपरिक स्रोतों को फिर से उपयोग में लाने के उद्देश्य से की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने कुएं न केवल सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, बल्कि जल संरक्षण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
इस परियोजना के तहत इन कुओं की सफाई, मरम्मत और पुनर्स्थापना की जाएगी, ताकि वे फिर से उपयोग योग्य बन सकें।
स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इससे भूजल स्तर को बनाए रखने और पर्यावरण संतुलन को सुधारने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा यह पहल पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकती है, क्योंकि ऐतिहासिक जल संरचनाएं लोगों को आकर्षित करती हैं।
स्थानीय लोगों ने भी इस कदम का स्वागत किया है और इसे शहर की पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर अमृतसर में जल विरासत को पुनर्जीवित करने की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
