25 सितंबर 2026 उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान की तारीख तय की है। इन 10 सीटों में से आठ सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के पास है। ऐसे में भाजपा के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा के सामने इस बार मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका देने और नए चेहरों को राज्यसभा भेजने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में कई नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के तौर पर सामने आए हैं, लेकिन पार्टी की ओर से अंतिम उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची अभी जारी नहीं की गई है।
10 सीटों पर होना है चुनाव
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब राज्य में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और 16 अक्टूबर को मतदान तथा मतगणना होगी।
इन सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त होना है। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के अलावा बृज लाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, नीरज शेखर और अन्य भाजपा सांसद शामिल हैं। दिनेश शर्मा की सीट उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।
नए चेहरों को लेकर चर्चा
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा उत्तर प्रदेश में इस बार अधिकतर नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा आठ भाजपा सांसदों में से कम से कम पांच को दोबारा मौका नहीं मिलने की चर्चा है। हालांकि, यह पार्टी सूत्रों पर आधारित रिपोर्ट है और अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व को करना है।
रिपोर्ट के अनुसार दलित चेहरे के तौर पर बृज लाल, जबकि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा मौका मिलने की संभावना की चर्चा है। इन नामों को लेकर भी अंतिम निर्णय पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्मृति ईरानी समेत कई नाम चर्चा में
जागरण की एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के संभावित चेहरों के रूप में कई नामों का उल्लेख किया गया है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी का नाम भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी नए चेहरों के साथ जातीय और महिला प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय करने पर विचार कर रही है।
इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, ब्राह्मण महिला चेहरे के तौर पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना मिश्रा और अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में बताए गए हैं। मृगांका सिंह और राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी के नाम का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।
महिला और सामाजिक समीकरण पर भी नजर
राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा जाट, ब्राह्मण, ओबीसी, दलित और महिला प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए संभावित नामों पर विचार कर सकती है।
गीता शाक्य की जगह किसी नए ओबीसी महिला चेहरे को मौका दिए जाने की चर्चा भी सामने आई है। इसी तरह बृज लाल के कार्यकाल के पूरा होने के बाद दलित वर्ग से नए चेहरे को राज्यसभा भेजने को लेकर भी कई नाम चर्चा में हैं।
पुराने सांसदों के भविष्य पर भी नजर
राज्यसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि मौजूदा सांसदों में से किन्हें पार्टी दोबारा मौका देगी। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और गीता शाक्य समेत मौजूदा सदस्यों के भविष्य को लेकर पार्टी के भीतर मंथन की स्थिति है।
वहीं, कुछ नेताओं के विधानसभा चुनाव में उतरने की संभावनाओं को देखते हुए भी राज्यसभा के लिए नए चेहरों की जगह बनाई जा सकती है। हालांकि, इन संभावनाओं पर अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व की ओर से ही होगा।
भाजपा के पास सीटों का गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की संख्या के कारण राज्यसभा की 10 सीटों में बड़ी संख्या पर NDA की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के पास अपने 256 विधायक और सहयोगी दलों के साथ पर्याप्त संख्या है। रिपोर्ट में दूसरी वरीयता के वोटों को भी संभावित चुनावी गणित का हिस्सा बताया गया है।
हालांकि, उम्मीदवारों की अंतिम संख्या और विपक्ष की रणनीति सामने आने के बाद ही चुनाव का पूरा गणित स्पष्ट होगा। अगर सीटों की संख्या के मुकाबले उम्मीदवार अधिक होते हैं, तो मतदान की स्थिति बन सकती है।
अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व करेगा
फिलहाल भाजपा के संभावित उम्मीदवारों को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। इनमें मौजूदा सांसदों के साथ-साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री, संगठन से जुड़े नेता और अलग-अलग सामाजिक समूहों से आने वाले चेहरे शामिल हैं। लेकिन अभी तक पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए अंतिम उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।
इसलिए किस नेता को टिकट मिलेगा और किस मौजूदा सांसद को दोबारा मौका नहीं मिलेगा, इसका फैसला पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होने के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
