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हरियाणा में कश्मीरियों की विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध सरकार: CM सैनी

20 सितंबर, 2026 :  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य सरकार हरियाणा में रहने वाले कश्मीरी समुदाय की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री शनिवार को गुरुग्राम में कश्मीर हिंदू सेल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। यह कार्यक्रम माता लल्लेश्वरी की 705वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था।

माता लल्लेश्वरी की 705वीं जयंती पर कार्यक्रम

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम में माता लल्लेश्वरी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके मंदिर में माथा टेका। इस दौरान उन्होंने कहा कि संतों और महान व्यक्तित्वों की शिक्षाएं समाज में नैतिक चेतना और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में समाज को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े मूल्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

माता लल्लेश्वरी की स्मृति में भवन के लिए जमीन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कश्मीरी समुदाय के लिए कई घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि माता लल्लेश्वरी की शिक्षाओं और विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनकी स्मृति में भवन के निर्माण के लिए नियमों के अनुसार जमीन आवंटित की जाएगी।

यह भवन समुदाय की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयोगी हो सकता है। सरकार की ओर से की गई इस घोषणा को कश्मीरी समुदाय से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

कश्मीरी पंडितों के प्लॉट पर ब्याज राशि लौटाने की घोषणा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बहादुरगढ़ के सेक्टर-2 में कश्मीरी पंडितों को आवंटित प्लॉट से संबंधित ब्याज राशि वापस करने की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि EDC और IDC पर लगी ब्याज राशि करीब 5.15 करोड़ रुपये है, जिसे वापस किया जाएगा।

सरकार के मुताबिक यह राशि उन प्लॉटों से संबंधित है जो कश्मीरी पंडितों को बहादुरगढ़ के सेक्टर-2 में आवंटित किए गए थे।

सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में रहने वाला कश्मीरी समुदाय राज्य का अभिन्न हिस्सा है और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक तथा सामाजिक विरासत का संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विकास के साथ-साथ लोगों की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखना जरूरी है।

कश्मीर के विकास और सांस्कृतिक स्थलों का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई विकास और सांस्कृतिक कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 और 35A के हटने से देश की एकता और अखंडता मजबूत हुई है।

उन्होंने चिनाब रेल पुल का जिक्र करते हुए कहा कि इससे कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद मिली है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के पुनरुद्धार के काम का भी उल्लेख किया।

देश की सांस्कृतिक विरासत का किया जिक्र

नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में देश के विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने केदारनाथ धाम, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के विकास एवं पुनरुद्धार का उदाहरण दिया।

इसके साथ ही उन्होंने कुरुक्षेत्र के विकास और श्री गुरु नानक देव से जुड़े पवित्र स्थलों को करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से जोड़ने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने इन पहलों को देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जोड़कर प्रस्तुत किया।

कश्मीरी समुदाय की पहचान को बनाए रखने की बात

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के बयानों का मुख्य जोर कश्मीरी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को बनाए रखने पर रहा। सरकार की ओर से माता लल्लेश्वरी की स्मृति में भवन के लिए जमीन देने और बहादुरगढ़ में कश्मीरी पंडितों से जुड़े प्लॉटों की ब्याज राशि लौटाने की घोषणाएं भी की गईं।

इन घोषणाओं के जरिए राज्य सरकार ने कश्मीरी समुदाय से जुड़े सांस्कृतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखा है।

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