• Fri. Sep 18th, 2026

दिल्ली के युवराज की गुरुग्राम में हत्या, पूर्व सहकर्मी और उसके साथी गिरफ्तार

18 सितंबर, 2026 :  दिल्ली के सरिता विहार निवासी 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की कथित हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, युवराज 6 सितंबर को लाजपत नगर के एक रेस्तरां से यह कहकर निकले थे कि उन्हें गुरुग्राम में अपनी पूर्व सहकर्मी से मिलना है। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। जांच के दौरान पुलिस ने उनकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर युवराज की हत्या कर शव को गुरुग्राम के एक नाले में फेंकने की बात बताई।

बहनों के साथ खरीदारी करने निकले थे युवराज

पुलिस के मुताबिक, 6 सितंबर को युवराज अपनी बहन के साथ लाजपत नगर के सेंट्रल मार्केट में खरीदारी करने गए थे। इसके बाद परिवार के लोग लाजपत नगर-II स्थित गोल्डन ड्रैगन रेस्तरां पहुंचे। शाम करीब 4 बजे युवराज ने परिवार को बताया कि उन्हें गुरुग्राम में अपनी पूर्व सहकर्मी से मिलना है और वह रात करीब 10 बजे तक घर लौट आएंगे।

जब काफी देर तक युवराज वापस नहीं लौटे तो परिवार ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की। कुछ समय बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। परिवार की चिंता बढ़ने पर उनकी तलाश शुरू की गई।

11 सितंबर को दर्ज कराई गई गुमशुदगी की शिकायत

युवराज की बहन ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि युवराज की आखिरी फोन बातचीत उनकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स के साथ हुई थी। परिवार को भी युवराज ने बताया था कि वह गुरुग्राम में वत्स से मिलने जा रहे हैं।

इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, तकनीकी जानकारी और CCTV फुटेज समेत अन्य सुरागों की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, युवराज और वत्स दोनों के फोन बंद हो गए थे, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।

पूर्व सहकर्मी और उसके साथी पर पुलिस को शक

जांच के दौरान आन्या वत्स पुलिस के सामने मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आईं। पुलिस को उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एक नए मोबाइल नंबर के बारे में जानकारी मिली। तकनीकी जांच से उसकी लोकेशन उत्तराखंड में मिलने के बाद पुलिस टीम वहां पहुंची।

पुलिस ने आन्या वत्स और उनके साथी संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया। दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

गुरुग्राम के नाले से मिला था अज्ञात शव

पुलिस के अनुसार, 10 सितंबर को गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र में एक नाले से एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। जांच के बाद शव की तस्वीरें युवराज के परिवार को दिखाई गईं। परिवार ने कपड़ों और शारीरिक पहचान के आधार पर शव की पहचान युवराज के रूप में की।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान दोनों गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर युवराज की हत्या करने और शव को गुरुग्राम में अपने घर के पास नाले में फेंकने की बात बताई है। हालांकि, हत्या के पीछे की पूरी वजह और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए जांच जारी है।

परिवार ने शव की कार्रवाई पर उठाए सवाल

मामले में युवराज के परिवार ने गुरुग्राम पुलिस द्वारा शव को संभालने के तरीके को लेकर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि पुलिस को 10 सितंबर को शव मिलने के बावजूद उन्हें समय पर इसकी जानकारी नहीं दी गई। परिवार ने यह भी दावा किया कि शव की पहचान के लिए जरूरी जानकारी ZIPNET पर समय से अपलोड नहीं की गई और 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

परिवार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जांच से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें, DNA नमूने और युवराज का सामान सुरक्षित रखने तथा उपलब्ध कराने की मांग की है। ये परिवार की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के दौरान होनी बाकी है।

हत्या की वजह का पता लगाने में जुटी पुलिस

पुलिस अब हत्या के पीछे की वजह, घटनाओं की पूरी टाइमलाइन और मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है। कुछ रिपोर्टों में संभावित वित्तीय विवाद को जांच के एक एंगल के तौर पर बताया गया है, लेकिन पुलिस ने अभी अंतिम तौर पर हत्या का मकसद स्थापित नहीं किया है।

पुलिस तकनीकी और फॉरेंसिक सबूत भी जुटा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि युवराज के साथ वास्तव में क्या हुआ था और हत्या के बाद शव को किस तरह ठिकाने लगाया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *