18 सितंबर, 2026 : हरियाणा के राज्यपाल ने मुरथल यूनिवर्सिटी की Executive Council में सदस्यों की नियुक्ति रद्द की, अब पुराने वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा की मांग
सोनीपत: हरियाणा के राज्यपाल एवं चांसलर द्वारा दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DCRUST), मुरथल की Executive Council (EC) के सदस्यों के नामांकन को रद्द किए जाने के बाद परिषद द्वारा लिए गए पुराने फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यूनिवर्सिटी की Teachers’ Association ने अब EC के कार्यकाल के दौरान लिए गए वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा करने की मांग की है।
राज्यपाल ने EC सदस्यों का नामांकन किया रद्द
हरियाणा के राज्यपाल एवं चांसलर ने 15 सितंबर को यूनिवर्सिटी की ओर से 27 फरवरी 2025 को जारी किए गए उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनके तहत Executive Council के सदस्यों का नामांकन किया गया था।
राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि EC के सदस्यों का दोबारा नामांकन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाए। इसमें रोटेशन और वरिष्ठता के स्थापित सिद्धांतों का पालन करने की बात कही गई है।
जिन सदस्यों का नामांकन रद्द किया गया, उनमें Architecture, Urban and Town Planning, Management Studies और Education फैकल्टी के डीन के अलावा Electronics and Communication विभाग के प्रोफेसर Manoj Kumar Duhan और Chemistry विभाग के प्रोफेसर Ashok Kumar Sharma शामिल थे।
तीन बैठकों में लिए गए फैसलों पर नजर
इन सदस्यों के कार्यकाल के दौरान Executive Council की तीन बैठकें हुई थीं। इनमें 1 मार्च 2025 को 44वीं बैठक, 22 मार्च को 45वीं बैठक और 22 अगस्त को 46वीं बैठक शामिल थी।
अब इन बैठकों में लिए गए कुछ फैसलों की वैधता और नियमों के अनुरूप होने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। Teachers’ Association का कहना है कि इन फैसलों की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।
वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों पर आपत्ति
Deenbandhu Chhotu Ram University Teachers’ Association (DCRUTA) ने पहले इन बैठकों में लिए गए कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी। संगठन ने दावा किया था कि कुछ फैसले यूनिवर्सिटी एक्ट और सरकारी नियमों के अनुरूप नहीं थे।
Association ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं और एक कानूनी सलाहकार की नियुक्ति, 400 कंप्यूटरों की खरीद, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के संगठनों के अध्यक्षों के खिलाफ जांच, Academic Adviser की नियुक्ति तथा जांच अधिकारियों और बाहरी सदस्यों को मानदेय देने जैसे फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
Teachers’ Association ने की फैसलों की समीक्षा की मांग
DCRUTA के अध्यक्ष डॉ. अजय डबास ने राज्यपाल-चांसलर के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने मांग की कि Executive Council का पुनर्गठन यूनिवर्सिटी एक्ट के अनुसार किया जाए और पिछली EC द्वारा लिए गए फैसलों की नए सिरे से समीक्षा हो।
Association का कहना है कि पुराने EC सदस्यों का नामांकन रद्द होने के बाद उस परिषद की संरचना को लेकर सवाल खड़े होते हैं। ऐसे में छात्रों, कर्मचारियों और यूनिवर्सिटी के व्यापक हित में पुराने फैसलों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
यूनिवर्सिटी को कथित वित्तीय नुकसान का दावा
Teachers’ Association के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ फैसलों के कारण यूनिवर्सिटी को वित्तीय नुकसान हुआ और कुछ मामलों में राज्य सरकार की अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई थी।
हालांकि, ये Association द्वारा लगाए गए आरोप हैं और उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। Vice-Chancellor Professor Shree Prakash Singh से संपर्क करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन उनकी ओर से प्रतिक्रिया नहीं मिली।
अब नए EC के गठन पर नजर
राज्यपाल के आदेश के बाद अब यूनिवर्सिटी की Executive Council में नए सदस्यों के नामांकन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। आदेश के अनुसार नई नियुक्तियों में रोटेशन और वरिष्ठता के निर्धारित सिद्धांतों का पालन किया जाना है।
इस बीच पुराने EC के कार्यकाल में लिए गए वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा की मांग ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है।
