21 अगस्त 2026 : केंद्र सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 9 वकीलों को अतिरिक्त जज (Additional Judges) नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इन सभी नए जजों को शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट में शपथ दिलाई जाएगी। शपथ हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा दिलाएंगे।
इन 9 वकीलों की हुई नियुक्ति
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किए गए 9 वकीलों के नाम हैं:
- मोनिका छिब्बर शर्मा
- हरमीत सिंह देओल
- प्रविंद्र सिंह चौहान
- राजेश गौड़
- पूजा चोपड़ा
- सुनीश बिंदलिश
- मिंदरजीत यादव
- दिव्या शर्मा
- रविंदर मलिक
इन नियुक्तियों की अधिसूचना केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को जारी की थी।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मई में भेजी थी सिफारिश
इन नामों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मई 2026 में मंजूरी दी थी। कॉलेजियम ने कुल 10 वकीलों के नामों को हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने फिलहाल 9 नामों की नियुक्ति अधिसूचित की है।
हाईकोर्ट में 4.22 लाख से अधिक मामले लंबित
नए जजों की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मामलों का भारी बोझ है। हाईकोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 85 है, जबकि नियुक्तियों से पहले कोर्ट में केवल 55 जज कार्यरत थे।
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार हाईकोर्ट में 4.22 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें करीब 2.55 लाख सिविल मामले और 1.67 लाख आपराधिक मामले शामिल हैं।
न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
इन 9 नए अतिरिक्त जजों की नियुक्ति से हाईकोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, 85 की स्वीकृत क्षमता की तुलना में जजों की संख्या अभी भी कम रहेगी।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए साझा हाईकोर्ट है।
हरियाणा के नए एडवोकेट जनरल की नियुक्ति की राह भी साफ
नियुक्त किए गए जजों में प्रविंद्र सिंह चौहान, जो वर्तमान में हरियाणा के एडवोकेट जनरल हैं, भी शामिल हैं। उनके हाईकोर्ट में जज बनने के बाद हरियाणा सरकार को राज्य के लिए नया एडवोकेट जनरल नियुक्त करना होगा। इससे राज्य के शीर्ष कानूनी पद को लेकर भी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 9 नए अतिरिक्त जजों की नियुक्ति न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ेगी और बड़ी संख्या में लंबित मामलों के निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है।
