5 अक्टूबर 2026 पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने रविवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन में तीन खंडों और करीब 1,980 पन्नों वाली ‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने पंजाब के इतिहास को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने को एक बड़ी जिम्मेदारी बताया।
सदियों के इतिहास को एक जगह दर्ज करने की पहल
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब ने सदियों के दौरान कई महत्वपूर्ण दौर देखे हैं। यहां कला, संस्कृति, साहित्य और सामाजिक परंपराओं की समृद्ध विरासत रही है। अलग-अलग समय में पंजाब ने संघर्ष, बदलाव और उपलब्धियों के कई अध्याय देखे हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब के इस लंबे इतिहास को दर्ज करना केवल अतीत को याद करने का काम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी माध्यम है।
संस्कृति से जुड़ी पहचान को बचाना जरूरी
CM मान ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और विरासत से जुड़ी होती है। इसलिए ऐतिहासिक धरोहर, साहित्य, कला और परंपराओं को संरक्षित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जो समाज अपने इतिहास और संस्कृति को संभालकर रखते हैं, वे अपनी पहचान को मजबूत बनाए रखते हैं। इसके विपरीत, अपनी विरासत को नजरअंदाज करने से आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से दूर हो सकती हैं।
युवाओं को इतिहास से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की युवा पीढ़ी को राज्य के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए। इसके लिए इतिहास को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने पंजाब के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को व्यवस्थित तरीके से दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने की आवश्यकता बताई, ताकि युवा अपने राज्य के अतीत और उसकी उपलब्धियों को समझ सकें।
गुरु साहिबान की शिक्षाओं का किया उल्लेख
भगवंत मान ने पंजाब की विरासत में सिख गुरुओं के योगदान और बलिदान की परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिबान ने लोगों को अत्याचार, अन्याय और दमन के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, त्याग और बहादुरी की यह भावना पंजाब के लोगों की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
आजादी की लड़ाई में पंजाब का योगदान
CM मान ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में पंजाब के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान पंजाब के लोगों ने बड़ी संख्या में बलिदान दिए।
उन्होंने पंजाब के इतिहास, संघर्ष, उपलब्धियों और लोगों के योगदान को राज्य के लिए गर्व का विषय बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विरासत को संरक्षित और दस्तावेजीकृत करना भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है।
‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक का विमोचन
चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने तीन खंडों वाली ‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक करीब 1,980 पन्नों की है और इसमें पंजाब की सदियों पुरानी यात्रा, बदलावों और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री ने इस तरह के दस्तावेजी प्रयासों को पंजाब की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचे पंजाब की विरासत
भगवंत मान ने कहा कि पंजाब की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है। इतिहास को दर्ज करने से युवा अपने समाज, संस्कृति और परंपराओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
उन्होंने पंजाब की पहचान से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि राज्य की विरासत को भविष्य तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘पंजाब दा इतिहास’ पुस्तक के विमोचन के दौरान राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब के इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य और बलिदान की परंपरा को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया।
