5 अक्टूबर 2026 हरियाणा के प्रमुख चिकित्सा संस्थान PGIMS-Rohtak ने कैंसर के इलाज और निदान को अधिक सटीक बनाने की दिशा में जीन रिसर्च की शुरुआत करने का फैसला किया है। संस्थान अब कैंसर से जुड़े जेनेटिक और मॉलिक्यूलर पहलुओं पर काम करेगा, जिससे भविष्य में मरीजों के लिए अधिक सटीक और लक्षित उपचार विकसित करने में मदद मिल सकती है।
कैंसर के जेनेटिक पहलुओं पर होगी रिसर्च
PGIMS के पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख और कॉन्फ्रेंस की आयोजन अध्यक्ष डॉ. सुनीता सिंह ने बताया कि संस्थान अब जीन के स्तर पर काम शुरू कर रहा है। इसका उद्देश्य कैंसर को मॉलिक्यूलर स्तर पर बेहतर तरीके से समझना और ऐसे विशेष मॉलिक्यूलर मार्कर्स की पहचान करना है, जो मरीज के इलाज को अधिक सटीक बनाने में मदद कर सकें।
इस तरह की रिसर्च से कैंसर के अलग-अलग प्रकारों और उनके व्यवहार को समझने में मदद मिल सकती है। साथ ही, मरीज की बीमारी के अनुसार लक्षित उपचार यानी टारगेटेड थेरेपी तय करने में भी बेहतर जानकारी मिल सकती है।
टारगेटेड थेरेपी को मजबूत करने पर जोर
PGIMS में शुरू की जा रही यह पहल कैंसर के इलाज में व्यक्तिगत और सटीक चिकित्सा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मॉलिक्यूलर मार्कर्स की पहचान होने से डॉक्टरों को बीमारी की प्रकृति समझने और उपचार की रणनीति तय करने में मदद मिल सकती है।
संस्थान का जोर केवल उपचार पर नहीं बल्कि कैंसर की सही पहचान और बीमारी के शुरुआती चरण में उसका पता लगाने पर भी है। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच और सही निदान से कैंसर के उपचार के बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
ब्रेस्ट कैंसर पर भी हुई चर्चा
यह जानकारी रोहतक में आयोजित दो दिवसीय Breast Pathology International Conference and Workshop के दौरान सामने आई। कार्यक्रम में पैथोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडियोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों ने कैंसर की पहचान और उपचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने ट्यूमर की ग्रेडिंग, बायोप्सी और अलग-अलग मॉलिक्यूलर मार्कर्स की भूमिका पर भी जानकारी साझा की। उनका कहना था कि सही पैथोलॉजिकल जांच उपचार की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होती है।
बायोप्सी और सही जांच जरूरी
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि कैंसर की पुष्टि और उसके प्रकार की पहचान के लिए सही बायोप्सी तथा उपयुक्त मार्कर्स का इस्तेमाल जरूरी है। स्लाइड और प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से कैंसरयुक्त और गैर-कैंसरयुक्त गांठों के बीच अंतर समझाया गया।
विशेषज्ञों ने लोगों से किसी भी संदिग्ध गांठ या कैंसर के लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की। समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेने और जरूरी जांच कराने पर जोर दिया गया।
महिलाओं को नियमित जांच की सलाह
डॉ. सुनीता सिंह ने महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने नियमित रूप से स्तनों की स्वयं जांच करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी असामान्य बदलाव या गांठ का पता चलने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े मामलों में सही निदान और उपचार की योजना बनाना कितना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों ने कैंसर को लेकर डरने के बजाय समय पर जांच और इलाज कराने का संदेश दिया।
कैंसर को लेकर डर नहीं, समय पर इलाज जरूरी
PGIMS के प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार ने कहा कि कई लोग गंभीर बीमारी की आशंका के डर से सामान्य स्वास्थ्य जांच तक कराने से बचते हैं। उन्होंने लोगों से बीमारी को छिपाने के बजाय समय पर डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की।
विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए और सही उपचार मिले तो कई मामलों में उपचार के अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
PGIMS में रिसर्च और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर
PGIMS-Rohtak पहले से ही अपनी रिसर्च और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। अगस्त में संस्थान को Rare Diseases के Centre of Excellence के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया था। संस्थान ने PET/CT मशीन और रिसर्च एवं डेवलपमेंट के लिए अतिरिक्त संसाधनों की योजना की जानकारी दी थी।
जीन और मॉलिक्यूलर स्तर पर कैंसर रिसर्च की शुरुआत इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इससे संस्थान में आधुनिक कैंसर निदान और उपचार से जुड़ी रिसर्च को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
