नई दिल्ली 16 अगस्त 2026 : 15 अगस्त 1947 को भारत जब आजाद हुआ तब देश के सामने गरीबी, सीमित बुनियादी ढांचे और बंटवारे के गहरे जख्मों की विकराल चुनौती थी। लेकिन चुनौतियों से पार पाते हुए भारत ने आधुनिक इतिहास में राष्ट्र-निर्माण की सबसे मिसाली यात्रा तय की है। आज भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है बल्कि एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है।
देश को विरासत में बड़े पैमाने पर गरीबी, सीमित औद्योगिक क्षमता और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा मिला। आर्थिक नज़रिए से भारत एक शुरुआती दौर वाला देश था, जिसकी क्षमताएं कम थीं। फिर भी उन मुश्किल शुरुआती हालात से निकलकर, भारत ने आधुनिक इतिहास में राष्ट्र-निर्माण की सबसे शानदार यात्राओं में से एक की शुरुआत की।
पहला काम आर्थिक विकास नहीं था। बल्कि एक राष्ट्र का निर्माण करना था। 1949 में भारत ने अपना संविधान अपनाया और लोकतंत्र, मौलिक अधिकारों, संघवाद, स्वतंत्र न्यायपालिका और सभी वयस्कों के लिए वोट के अधिकार के प्रति खुद को समर्पित किया। ऐसे समय में जब आज़ाद हुए कई नए देश राजनीतिक संस्थाएं बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे भारत ने अपने विकास की नींव के तौर पर लोकतंत्र को चुना। आठ दशक बाद भी यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम मोड़ 1991 में आया जब भारत ने बड़े आर्थिक सुधार किए और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ और गहराई से जुड़ना शुरू किया। उदारीकरण, निजी उद्यम और वैश्वीकरण ने भारतीय उद्यमिता और प्रतिभा की क्षमता को उजागर करने में मदद की।

भारत का बदलाव
नवीनतम आधिकारिक अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी में 7.7% की वृद्धि हुई लेकिन ज़्यादा महत्वपूर्ण कहानी वह है जो इस विकास के पीछे है। यह आधुनिक हाईवे, एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, रेलवे और मेट्रो सिस्टम में, तेज़ी से बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा उत्पादन और अंतरिक्ष क्षेत्र में और अत्याधुनिक उत्पादों को डिज़ाइन करने, बनाने और निर्यात करने की भारत की बढ़ती क्षमता में दिखाई देता है।
भारत का असाधारण डिजिटल बदलाव एक उल्लेखनीय कहानी है – जिसे दुनिया के साथ साझा किया जाना चाहिए। JAM ट्रिनिटी – जन धन बैंक खाते, आधार बायोमेट्रिक कार्ड और मोबाइल ने वित्तीय समावेशन और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी के लिए एक ढांचा तैयार किया। डिजिटल इंडिया ने इसे और आगे बढ़ाया है।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने दिखाया है कि भारत जैसे आकार का देश कैसे ऐसा डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा बना सकता है जो इंटरऑपरेबल (आपस में जुड़ने वाला), समावेशी और वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने के काबिल हो। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में अब फ्रांस, सिंगापुर और UAE जैसे देशों की भी दिलचस्पी बढ़ रही है।
अगले चरण में बड़ी महत्वाकांक्षा, गहरे तालमेल और मिलकर काम करने (co-creation) पर ज़ोर होना चाहिए। द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT), मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चल रही बातचीत और 2026 के लिए भारत-इज़राइल संयुक्त कार्य योजना इस अगले अध्याय के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करते हैं।

भारत का विशाल दायरा, मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं और आम लोगों तक समाधान पहुंचाने की काबिलियत, इज़राइल के बेहतरीन इनोवेशन इकोसिस्टम के साथ मिलकर काम कर सकती हैं। इसलिए, हमें अपने उद्यमियों, शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों, स्टार्ट-अप्स और व्यवसायों को एक साथ लाना चाहिए ताकि AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस, साइबर टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी को मिलकर विकसित, उत्पादित और बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके।
वहीं भारत और इज़राइल मिलकर तीसरे देशों के बाज़ारों में, खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ में, नए, किफायती और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले समाधान पहुंचा सकते हैं। हम साथ मिलकर एक ऐसी साझेदारी बना सकते हैं जो न केवल हमारे राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाए बल्कि एक ज़्यादा इनोवेटिव, समृद्ध और शांतिपूर्ण दुनिया बनाने में भी योगदान दे। यह सफर असाधारण रहा है। मंज़िल अभी आगे है और भारत-इज़राइल साझेदारी भविष्य को आकार देने में एक अहम भूमिका निभा सकती है।
