3 अक्टूबर 2026 चंडीगढ़ स्थित Sukhna Wildlife Sanctuary में जैव विविधता में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देहरादून स्थित Wildlife Institute of India (WII) की ओर से किए गए 2025 के सर्वे में अभयारण्य में स्तनधारियों, पक्षियों, तितलियों, सरीसृपों और उभयचरों के साथ-साथ वनस्पतियों की भी विस्तृत जांच की गई। सर्वे के दौरान कुल 16 स्तनधारी, 132 पक्षी, 73 तितली और 13 सरीसृप-उभयचर प्रजातियां दर्ज की गईं।
2021 के मुकाबले बढ़ी प्रजातियों की संख्या
2025 के सर्वे में दर्ज आंकड़ों की तुलना 2021 में किए गए सर्वे से की गई है। 2021 में 13 स्तनधारी प्रजातियां दर्ज की गई थीं, जबकि 2025 के सर्वे में इनकी संख्या बढ़कर 16 हो गई। इससे अभयारण्य में दर्ज स्तनधारी जैव विविधता में वृद्धि सामने आई है।
2025 का सर्वे पहले के सर्वे की तुलना में अधिक व्यापक था। इसमें केवल प्रमुख वन्यजीवों पर ध्यान देने के बजाय वनस्पतियों, पक्षियों, तितलियों, सरीसृपों और उभयचरों को भी अध्ययन में शामिल किया गया।
132 पक्षी और 73 तितली प्रजातियां दर्ज
नए सर्वे में Sukhna Wildlife Sanctuary में 132 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। इसके अलावा 73 तितली प्रजातियों की भी पहचान की गई। सर्वे में 13 सरीसृप और उभयचर प्रजातियां भी दर्ज हुईं।
वनस्पति सर्वे के दौरान 43 पेड़, 14 झाड़ियां और 22 शाकीय पौधों की प्रजातियां दर्ज की गईं। इस तरह सर्वे ने अभयारण्य के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति को समझने के लिए व्यापक जानकारी उपलब्ध कराई।
सांभर की संख्या 603 आंकी गई
अभयारण्य में पाए जाने वाले प्रमुख शाकाहारी वन्यजीवों में सांभर भी शामिल है। 2021 के सर्वे में सांभर की अनुमानित संख्या 290 से 763 के बीच बताई गई थी। नए सर्वे में इसकी संख्या 603 आंकी गई।
इसके अलावा गोल्डन जैकल अभयारण्य में प्रमुख मांसाहारी प्रजातियों में बना हुआ है। कैमरा ट्रैप के माध्यम से तेंदुए की मौजूदगी की भी पुष्टि हुई है।
पहली बार नहीं, लेकिन निगरानी का दायरा हुआ व्यापक
Sukhna Wildlife Sanctuary में 2021 के सर्वे के दौरान जंगल कैट और बार्किंग डियर की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। 2025 का सर्वे इससे अलग इस मायने में महत्वपूर्ण रहा कि इसमें वन्यजीवों के साथ-साथ तितलियों, सरीसृपों और उभयचरों तथा वनस्पतियों को भी व्यवस्थित रूप से शामिल किया गया।
इससे अभयारण्य में अलग-अलग जीव-जंतुओं और उनके आवास की स्थिति को व्यापक तरीके से समझने में मदद मिली है।
प्राकृतिक पुनर्जनन और आक्रामक प्रजातियां चुनौती
हालांकि जैव विविधता में बढ़ोतरी के बीच सर्वे में कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार कई स्थानीय पेड़-पौधों की प्रजातियों में प्राकृतिक पुनर्जनन पर्याप्त नहीं हो रहा है।
इसके अलावा यूकेलिप्टस, सुबबूल, विलायती कीकर और लैंटाना जैसी आक्रामक प्रजातियों का फैलाव भी वन क्षेत्र के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसी वनस्पतियां स्थानीय प्रजातियों के विकास और प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर सकती हैं।
घास के मैदानों में फूल वाले पौधों की कमी
सर्वे में घास के मैदान वाले क्षेत्रों में फूल देने वाले पौधों की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार Arundo donax का फैलाव तितलियों की विविधता और व्यापक आवास पर असर डाल सकता है।
तितलियां पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उनकी विविधता वनस्पतियों तथा अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों से भी जुड़ी होती है। इसलिए उनके आवास की स्थिति पर निगरानी बनाए रखना जरूरी माना गया है।
आर्द्रभूमि और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण पर जोर
सर्वे रिपोर्ट में Sukhna Wildlife Sanctuary के आर्द्र क्षेत्रों और जल निकायों के पुनरुद्धार की जरूरत बताई गई है। इसके साथ ही आक्रामक प्रजातियों को नियंत्रित करने और अलग-अलग मौसमों में लगातार निगरानी करने की सिफारिश की गई है।
लंबे समय तक निगरानी से यह समझने में मदद मिल सकती है कि अभयारण्य की जैव विविधता में समय के साथ किस तरह बदलाव हो रहा है और किन प्रजातियों को संरक्षण की अधिक जरूरत है।
2,600 हेक्टेयर में फैला है अभयारण्य
चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार Sukhna Wildlife Sanctuary करीब 2,600 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और Sukhna Lake के कैचमेंट क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र शिवालिक पहाड़ियों में स्थित है और यहां विभिन्न प्रकार के पेड़, झाड़ियां, घास, पक्षी, स्तनधारी, सरीसृप और तितलियां पाई जाती हैं।
अभयारण्य में जैव विविधता को बनाए रखने के साथ-साथ मिट्टी के कटाव और जल संरक्षण से जुड़े उपाय भी किए जाते रहे हैं। वन क्षेत्र और जल निकाय Sukhna Lake के पारिस्थितिक तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
कुल मिलाकर, Sukhna Wildlife Sanctuary के 2025 के व्यापक सर्वे में जैव विविधता के कई सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। स्तनधारी प्रजातियों की संख्या 2021 के 13 से बढ़कर 2025 में 16 हुई, जबकि 132 पक्षी और 73 तितली प्रजातियां भी दर्ज की गईं। हालांकि, स्थानीय वनस्पतियों के कमजोर प्राकृतिक पुनर्जनन और आक्रामक प्रजातियों के फैलाव जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
