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अमृतसर में महिला कलाकारों की कला का उत्सव, पंजाब और चंडीगढ़ की कलाकारों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र

6 सितंबर 2026   महिलाओं की कला और रचनात्मक प्रतिभा को सम्मान देने के उद्देश्य से अमृतसर में एक विशेष कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। पंजाब ललित कला अकादमी और चंडीगढ़ ललित कला अकादमी ने संयुक्त रूप से ‘Celebrating Together — Women Artists of Punjab and Chandigarh’ थीम पर इस प्रदर्शनी का आयोजन किया है। इसमें पंजाब और चंडीगढ़ की प्रतिष्ठित और उभरती महिला कलाकारों की कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

महिला कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच

यह प्रदर्शनी महिलाओं की कला को सामने लाने के साथ-साथ उनके अनुभवों, विचारों और भावनाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति देने का माध्यम बनी है। अलग-अलग शहरों और सामाजिक एवं व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से आने वाली कलाकारों ने अपनी कला के जरिए प्रेम, सद्भाव, देशभक्ति, एकता और मानवीय संवेदनाओं जैसे विषयों को प्रस्तुत किया है।

प्रदर्शनी में कलाकारों की विविध शैलियों और माध्यमों को एक साथ देखने का अवसर कला प्रेमियों को मिल रहा है।

पंजाब और चंडीगढ़ की कलाकारों ने लिया हिस्सा

प्रदर्शनी में पंजाब की कमल सोहल, राजिंदर कौर पसरीचा और जीवन दुरेजा की कलाकृतियां शामिल हैं। वहीं चंडीगढ़ से प्रो. साधना सांगर, कलाकार अराधना टंडन और मूर्तिकार गुरमीत गोल्डी ने हिस्सा लिया है।

इन कलाकारों की अलग-अलग रचनात्मक शैलियां प्रदर्शनी को खास बनाती हैं। कला प्रेमियों को यहां कई तरह के कलात्मक माध्यमों और विषयों को देखने का मौका मिल रहा है।

पेंटिंग से लेकर वीडियो इंस्टॉलेशन तक

प्रदर्शनी में सिर्फ पेंटिंग ही नहीं बल्कि स्कल्पचर, ग्राफिक्स, ड्रॉइंग और वीडियो इंस्टॉलेशन भी प्रदर्शित किए गए हैं। अलग-अलग माध्यमों के इस्तेमाल ने प्रदर्शनी को व्यापक रूप दिया है।

कलाकृतियों में कलाकारों के व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक संवेदनाओं की झलक देखने को मिलती है। इससे दर्शकों को कला को केवल देखने के बजाय उसके पीछे छिपे विचारों और भावनाओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

कला के जरिए एकता और सद्भाव का संदेश

आयोजकों के अनुसार, कला लोगों को जोड़ने और आपसी संबंधों को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम हो सकती है। प्रदर्शनी के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि जब कला लोगों को जोड़ती है तो उनके बीच समझ, संवेदना और सद्भाव भी मजबूत होता है।

आज के समय में जब समाज को सह-अस्तित्व, संवेदनशील संवाद और आपसी समझ की जरूरत है, ऐसे आयोजनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

महिला सशक्तिकरण को रचनात्मक अभिव्यक्ति

पंजाब ललित कला अकादमी के अध्यक्ष और कलाकार सुमीत दुआ ने महिला कलाकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारतीय कला के इतिहास में महिलाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने अमृता शेर-गिल का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने भारतीय जीवन, ग्रामीण समाज और महिलाओं के अनुभवों को आधुनिक भारतीय कला में महत्वपूर्ण स्थान दिया।

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में कई महिला कलाकारों ने सामाजिक और संस्थागत बाधाओं के बावजूद अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है।

कला केवल कैनवास तक सीमित नहीं

इंडियन एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स, अमृतसर के अध्यक्ष राजिंदर मोहन चिन्ना ने कहा कि महिला सशक्तिकरण को केवल एक विचार के रूप में नहीं बल्कि रचनात्मक शक्ति के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

जब कोई महिला अपने अनुभवों, विचारों और भावनाओं को कला के माध्यम से व्यक्त करती है तो उसकी आवाज केवल कैनवास तक सीमित नहीं रहती, बल्कि व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा बन जाती है।

8 सितंबर तक देख सकेंगे प्रदर्शनी

यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों और आम दर्शकों के लिए 8 सितंबर तक खुली रहेगी। दर्शक रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकते हैं।

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