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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हरियाणा सरकार की 2002 की रिमिशन नीति 2008 की नीति पर होगी लागू

Byjangesamachar

Jul 3, 2026

3 जुलाई 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि हरियाणा सरकार की वर्ष 2002 की रिमिशन (सजा में छूट) नीति, वर्ष 2008 की नीति पर प्रभावी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों में दोषियों की समयपूर्व रिहाई (Premature Release) पर निर्णय लेते समय 2002 की नीति लागू की जाएगी।

अदालत ने कहा कि किसी दोषी की समयपूर्व रिहाई पर विचार उसी रिमिशन नीति के आधार पर किया जाना चाहिए, जो उसके मामले पर कानूनी रूप से लागू होती है।

क्या है रिमिशन नीति?

रिमिशन नीति के तहत अच्छे आचरण, जेल में बिताए गए समय और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर दोषियों की सजा में छूट या समयपूर्व रिहाई पर विचार किया जाता है। अलग-अलग समय पर राज्य सरकारें नई रिमिशन नीतियां लागू करती रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित मामले में 2002 की नीति लागू होगी और उसी के अनुरूप दोषी की रिहाई पर निर्णय लिया जाएगा। अदालत ने इस संबंध में हरियाणा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

कानूनी मामलों पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का प्रभाव हरियाणा में लंबित ऐसे मामलों पर पड़ सकता है, जिनमें समयपूर्व रिहाई के लिए लागू रिमिशन नीति को लेकर विवाद है। हालांकि, प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों और लागू कानून के आधार पर अलग-अलग होगा।

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