18 अगस्त 2026: हरियाणा सरकार ने अपनी नई Progressive MSME & Export Promotion Policy, 2026 में 16 श्रेणियों के प्रदूषणकारी और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील उद्योगों को सरकारी प्रोत्साहनों से बाहर कर दिया है। नीति को 8 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया गया था। इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में ₹55,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना और 5 लाख रोजगार पैदा करना है।
किन उद्योगों को नहीं मिलेगा लाभ?
नीति के Clause 6.1 और Annexure-I में इन उद्योगों को “Restrictive List” में रखा गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- स्टोन क्रशर और स्टोन वॉशरी
- चूना और ईंट भट्ठे
- फ्लाई ऐश और सीमेंट ब्लॉक इकाइयां
- कॉपर और जिंक स्मेल्टर
- टेनरी यानी चमड़ा उद्योग
- सल्फ्यूरिक एसिड और इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयां
- इस्तेमाल किए गए तेल की रिफाइनिंग
- बिना Zero Liquid Discharge (ZLD) सिस्टम वाली डाईंग और डाई-इंटरमीडिएट इकाइयां
- पटाखा निर्माण इकाइयां
- हैचरी को छोड़कर पोल्ट्री इकाइयां
इसके अलावा आवासीय क्षेत्रों में ट्रेड एफ्लुएंट या वायु प्रदूषण पैदा करने वाली इकाइयों तथा भूजल की कमी वाले “Dark Zones” में स्थित उद्योगों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
सरकार ने ऐसा क्यों किया?
सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश और रोजगार के साथ पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करना है। इन उद्योगों से वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूजल पर दबाव और औद्योगिक कचरे से जुड़ी समस्याएं पैदा होने की आशंका अधिक रहती है।
खासकर स्टोन क्रशिंग और खनन गतिविधियों को लेकर अरावली क्षेत्र में पर्यावरण संबंधी चिंताएं रही हैं। इसी तरह डाईंग, टेनिंग और केमिकल उद्योगों से औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषित पानी छोड़े जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
बाकी MSME को क्या मिलेगा?
नई नीति में पात्र उद्योगों को कैपिटल सब्सिडी, राज्य GST की प्रतिपूर्ति और स्टांप ड्यूटी रिफंड जैसे प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। लाभ की मात्रा उद्योग के स्थान और संबंधित जोन के आधार पर अलग-अलग होगी।
सरकार का लक्ष्य ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देना है जो निवेश और रोजगार पैदा करने के साथ-साथ राज्य की पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हों।
अब इंस्पेक्शन भी होगा
नई नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव स्वतंत्र थर्ड-पार्टी निरीक्षण का है। सरकार वित्तीय प्रोत्साहन जारी करने से पहले उद्योगों के नियमों के पालन की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की योजना बना रही है। इससे केवल self-certification पर निर्भरता कम होगी।
सरकार का बड़ा लक्ष्य
हरियाणा की नई MSME नीति का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में ₹55,000 करोड़ का निवेश और 5 लाख रोजगार हासिल करना है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे बड़े औद्योगिक एवं निर्यात केंद्रों को इसका प्रमुख लाभ मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, हरियाणा ने 16 उद्योगों को इसलिए MSME प्रोत्साहनों से बाहर किया है क्योंकि सरकार नई औद्योगिक नीति के तहत प्रदूषण, जल संकट और पर्यावरणीय जोखिम वाले कारोबार को सरकारी वित्तीय सहायता देने से बचना चाहती है। दूसरी ओर, पर्यावरणीय मानकों का पालन करने वाले और रोजगार व निवेश बढ़ाने वाले MSME को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया है।
